मेलबर्न, आठ जुलाई (द कन्वरसेशन) ‘सनडाउनिंग’ शब्द का कभी-कभी इस्तेमाल ‘डिमेंशिया’ से पीड़ित लोगों में एक प्रवृत्ति बताने के लिए किया जाता है जो दोपहर बाद और रात में अधिक भ्रमित होने की शिकायत करते हैं।
शुरूआत में, मुझे ‘सनडाउनिंग’ शब्द का इस्तेमाल सरल तरीके से करना चाहिए क्योंकि यह एक कूट शब्द है जो विभिन्न परिदृश्य में कई व्यवहारों को रेखांकित करता है। डिमेंशिया में बदले हुए व्यवहार का आकलन करते समय इस दौरान लोग असल में जो कुछ करते हैं, उस बारे में पूरा विवरण सुनना बेहतर होता है, बजाय केवल यह स्वीकार करना कि वे ‘सनडाउनिंग’ हो रहे हैं।
यह व्यवहारों का एक समूह है,जिसे आमतौर पर ‘सनडाउनिंग’ कहा जाता है, जिसमें अक्सर भ्रम, बेचैनी,घबराहट आदि शामिल होती हैं, हालांकि यह इन्हीं लक्षणों तक सीमित नहीं है। यह डिमेंशिया के विभिन्न चरणों में और पिछले व्यवहार की पद्धतियों पर अलग-अलग नजर आ सकता है।
फिर क्यों, इस तरह के बदले हुए व्यवहार दिन में एक विशेष समय पर हुआ करते हैं? और जब आपके किसी प्रियजन के साथ यह होता है तब आपको क्या करना चाहिए?
हम सभी अपनी पांच ज्ञानेंद्रिंयों से मस्तिष्क तक पहुंचने वाली सूचनाओं से जगत की व्याख्या करते हैं। इनमें प्रमुख दृष्टि और ध्वनि है।
डिमेंशिया से ग्रसित लोग संवेदक सूचनाओं पर निर्भर करते हैं ताकि वे वातावरण की व्याख्या कर सकें।
दिन ढलने पर जब प्रकाश कम हो जाता है, तब डिमेंशिया मरीज की मदद करने के लिए उपलब्ध संवेदक सूचना जगत के बारे में उसे बताता है।
इसका मस्तिष्क पर यह प्रभाव पड़ता है कि भ्रम बढ़ जाता है और अप्रत्याशित व्यवहार देखने को मिलता है।
संज्ञानात्मक शून्यता:
हम सबने सुना है कि मानव अपने मस्तिष्क की शक्ति के केवल एक हिस्से का उपयोग करता है, और यह सच है कि हम अपने रोजमर्रा के कामकाज के लिए जरूरी मस्तिष्क की शक्ति से अधिक शक्ति रखते हैं।
इस संज्ञानात्मक रिजर्व का उस वक्त उपयोग होता है जब हम जटिल या तनावपूर्ण कार्य करते हैं जिसके लिए अधिक मानसिक परिश्रम की जरूरत पड़ती है। लेकिन तब क्या होगा जब आपके पास अधिक संज्ञानात्मक रिजर्व नहीं हो?
ये बदलाव आखिरकार अल्जाइमर रोग के लक्षणों की ओर ले जाते हैं, जो लक्षणों की शुरूआत होने से करीब 30 साल पहले विकसित होना शुरू हो सकता है।
उस वक्त, सामान्य शब्दों में परिस्थिति हमारे संज्ञानात्मक रिजर्व का उपयोग करती है।
यह केवल तभी होता है जब नुकसान इतना अधिक होता है कि हमारे मस्तिष्क इसकी क्षतिपूर्ति नहीं कर सकते हों, जो हममें अल्जाइमर रोग के प्रथम लक्षणों और अन्य डिमेंशिया से विकसित होते हैं।
नतीजतन, डिमेंशिया से ग्रसित लोगों को हममें से ज्यादातर की तुलना में दिन प्रतिदन के कार्यों में अधिक मानसिक श्रम करने की जरूरत पड़ती है।
हम सभी मानसिक श्रम और अत्यधिक ध्यान देकर एक कठिन काम करने के बाद संज्ञानात्मक थकान महसूस करते हैं।
यदि मेरे किसी प्रियजन के साथ ऐसा हो जाए तो मैं क्या करूं?
दोपहर के भोजन के बाद एक संक्षिप्त अवधि की नींद दिन के संज्ञानात्मक थकान को कम करने में मदद कर सकती है। यह मस्तिष्क को और साथ ही व्यक्ति के लचीलेपन को 'रिचार्ज' करने में मदद कर सकती है।
हालांकि, व्यवहार में बदलाव में योगदान देने वाले अन्य कारणों के पूर्ण मूल्यांकन का कोई विकल्प नहीं है।
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