कोलकाता, 17 जून पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सी. वी. आनंद बोस ने शनिवार शाम दक्षिण 24 परगना जिले के हिंसाग्रस्त क्षेत्र कैनिंग का दौरा किया। उन्होंने कहा कि राज्य में ‘‘ऐसा लगता है कि भीड़तंत्र, लोकतंत्र पर हावी हो गया है।’’
बोस ने पंचायत चुनाव के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने को लेकर छिटपुट हिंसा के दौरान तृणमूल कांग्रेस के एक कार्यकर्ता की मौत के बाद स्थिति का जायजा लेने के लिए कैनिंग का दौरा किया।
बोस ने उसी जिले के भंगोर इलाके का भी दौरा किया था, जहां शुक्रवार को दो राजनीतिक दलों के बीच हुई झड़प में तीन लोगों की मौत हो गई थी।
स्थानीय लोगों, पुलिस अधिकारियों और विपक्षी राजनीतिक दलों के सदस्यों से बात करने के बाद, राज्यपाल ने कहा कि उन्होंने आम लोगों में अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने के लिए आत्मविश्वास की कमी देखी है।
राजभवन के सूत्रों ने कहा कि बोस ने कैनिंग जाने के लिए चेन्नई की अपनी निर्धारित यात्रा रद्द कर दी।
उन्होंनें कहा, ‘‘मैंने खुद देखा था कि यहां क्या हुआ था। मैंने पीड़ितों की पीड़ा को सुना है। मैं बहुत व्यथित हूं। यह कतई स्वीकार्य स्थिति नहीं है। आम आदमी को बिना किसी भय या पक्षपात के मताधिकार का इस्तेमाल करने का अधिकार मिला है। मुझे उनमें आत्मविश्वास की कमी नजर आती है।’’
राज्यपाल ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘यह लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। ऐसा लगता है कि भीड़तंत्र, लोकतंत्र पर हावी हो गया है।’’
राज्यपाल ने कहा है कि हिंसा को बर्दाश्त नहीं किया जायेगा और झड़प की घटनाओं के लिए दोषी व्यक्तियों को बख्शा नहीं जायेगा।
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में आठ जून को होने वाले पंचायत चुनाव के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने को लेकर हुई झड़पों में कम से कम पांच लोग मारे गए हैं।
इस बीच तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के प्रवक्ता कुणाल घोष ने आरोप लगाया कि राज्यपाल मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा), कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के आरोपों के आधार पर तृणमूल कांग्रेस की ‘‘निंदा’’ कर रहे हैं।
टीएमसी के वरिष्ठ सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा, “क्या राज्यपाल राजनीतिक एजेंट हैं? ट्रेन हादसे में मरने वालों से मिलने क्यों नहीं गये? यदि तृणमूल कांग्रेस से किसी की मौत होती है तो वह वहां नहीं जाते हैं।’’
ओडिशा में दो जून को ट्रेन दुर्घटना में मारे गये लोगों में से कई लोग पश्चिम बंगाल के थे।
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