नयी दिल्ली, 16 अप्रैल उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को कहा कि वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 के खिलाफ प्रदर्शनों के दौरान हो रही हिंसा ‘‘बहुत व्यथित करने वाली’’ है।
प्रधान न्यायाधीश संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति के वी विश्वनाथन की पीठ ने नव-संशोधित वक्फ कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की।
न्यायामूर्ति खन्ना ने कहा, ‘‘एक बात जो बहुत व्यथित करने वाली है, वह है यहां हो रही हिंसा। अगर मामला यहां लंबित है तो ऐसा नहीं होना चाहिए।’’
इसी तरह की भावना व्यक्त करते हुए केंद्र की ओर से उपस्थित सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, ‘‘वे (प्रदर्शनकारी) सोचते हैं कि वे इससे व्यवस्था पर दबाव बना सकते हैं।’’
मामले में एक मुस्लिम संगठन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने विधि अधिकारी की दलीलों का विरोध किया और कहा, ‘‘कौन किस पर दबाव बना रहा है, हमें नहीं पता।’’
इसके बाद प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि ‘‘विधेयक में कुछ सकारात्मक बिंदु’’ हैं जिन्हें रेखांकित किया जाना चाहिए।
पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के भांगर क्षेत्र में वक्फ कानून से संबंधित हिंसा की ताजा घटनाएं 14 अप्रैल को हुईं। वहीं, पुलिस ने दावा किया कि इससे पहले दंगे का सामना करने वाले मुर्शिदाबाद में कानून और व्यवस्था की स्थिति काफी हद तक नियंत्रण में है।
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने हाल ही में हिंसा प्रभावित मुर्शिदाबाद जिले में केंद्रीय बलों की तैनाती का आदेश दिया था।
वक्फ (संशोधन) अधिनियम के खिलाफ प्रदर्शनों के दौरान 11 और 12 अप्रैल को मुर्शिदाबाद जिले के कुछ हिस्सों, मुख्य रूप से सुती, समसेरगंज, धुलियान और जंगीपुर में सांप्रदायिक हिंसा में कम से कम तीन लोग मारे गए और सैकड़ों लोग बेघर हो गए।
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