ठाणे, 31 अगस्त ठाणे जिला उपभोक्ता विवाद निस्तारण आयोग ने वोडाफोन आइडिया को निर्देश दिया कि वह अपनी सेवाओं में कमी के लिये एक उपभोक्ता को सात हजार रुपये अदा करे। कंपनी ने ग्राहक के पोस्टपेड सिम को प्री-पेड सिम में नहीं बदला था।
ठाणे शहर में रहने वाले जावेद युसूफ शेख ने आयोग को बताया कि वह अपने पोस्टपेड सिम को प्री-पेड सिम में बदलवाना चाहता था और इसके लिये उसने सभी प्रक्रियाएं पूरी कीं। ठाणे की एक गैलरी में इसके लिये शुल्क भी दिया और नौ मार्च 2014 को उसे नया सिमकार्ड भी दे दिया गया।
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उससे वादा किया गया था कि दो से तीन दिनों के अंदर सिम कार्ड को प्री-पेड में बदल दिया जाएगा लेकिन यह नहीं हुआ।
इस बीच टेलीकॉम कंपनी (तब वोडाफोन एस्सार लिमिटेड) ने उसे पोस्टपेड सेवाओं के लिये बिल जारी कर दिया और शिकायतकर्ता ने निर्बाध सेवा के लिये उसे अदा कर दिया।
ग्राकह ने कहा कि भुगतान के बावजूद कंपनी ने जुलाई 2014 में उस मोबाइल नंबर की सेवाएं बंद कर दीं।
कंपनी द्वारा उसके सिम को पोस्टपेड से प्री-पेड में बदलने के अनुरोध पर जब कोई सुनवाई नहीं की गई तो उसने मुआवजे के तौर पर नौ लाख रुपये तथा वाद दायर करने पर हुए खर्च के लिये 20 हजार रुपयों की मांग करते हुए उपभोक्ता मंच में शिकायत की ।
टेलीकॉम कंपनी और गैलरी ने दलील दी कि पीडीएफ फॉरमेट में भुगतान की रसीद जमा कराने के लिये शिकायतकर्ता से कई बार पत्राचार और फोन किये जाने के बावजूद उसने ऐसा नहीं किया। इसलिये शिकायतकर्ता के मोबाइल नंबर को पोस्टपेड से प्री-पेड में बदलने के अनुरोध को पूरा नहीं किया जा सका।
दोनों पक्षों को सुनने के बाद आयोग के पीठासीन सदस्य एस जेड पवार और सदस्य पूनम वी महर्षि ने इस महीने दिये गए अपने आदेश में कहा कि कंपनी शिकायतकर्ता को आवश्यक सेवा देने में नाकाम रही और उसे छोटे से काम के लिये यहां-वहां भागने को मजबूर किया।
आयोग ने कहा कि हम शिकायतकर्ता को हुई मानसिक परेशानी के लिये 5000 रुपये और मामला दायर करने पर हुए खर्च के तौर पर 2000 रुपये उसे देने का निर्देश कंपनी को देते है। 60 दिन के अंदर यह रकम शिकायतकर्ता को दी जाए। ऐसा न करने पर जुर्माने की रकम पर छह प्रतिशत की दर से ब्याज देय होगा।
शिकायतकर्ता के सिम कार्ड को प्री-पेड में बदलने का निर्देश भी दिया गया है।
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