जरुरी जानकारी | वोडाफोन आइडिया शेयरधारकों से मांगेगी कर्ज सीमा एक लाख करोड़ रुपये तक बढ़ाने की अनुमति

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. कर्ज के बोझ में दबी दूरसंचार कंपनी वोडाफोन आइडिया आगामी वार्षिक आम बैठक (एजीएम) में शेयरधारकों से कर्ज सीमा बढ़ाकर एक लाख करोड़ रुपये करने की अनुमति मांगेगी। कंपनी की एजीएम 30 सितंबर को होना तय है।

नयी दिल्ली, सात सितंबर कर्ज के बोझ में दबी दूरसंचार कंपनी वोडाफोन आइडिया आगामी वार्षिक आम बैठक (एजीएम) में शेयरधारकों से कर्ज सीमा बढ़ाकर एक लाख करोड़ रुपये करने की अनुमति मांगेगी। कंपनी की एजीएम 30 सितंबर को होना तय है।

कंपनी के शेयरधारकों ने सितंबर 2014 में कंपनी के लिए कर्ज सीमा 25,000 करोड़ रुपये तय की थी। तब कंपनी आइडिया सेल्युलर के नाम से सूचीबद्ध थी।

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शेयर बाजार को दी जानकारी में वोडाफोन आइडिया लिमिटेड ने सोमवार को कहा कि सितंबर 2014 में पारित कंपनी के संकल्प में प्रीमियम प्रतिभूतियों का उल्लेख नहीं किया गया है। कंपनी की कर्ज क्षमता को बढ़ाने के लिए प्रीमियम प्रतिभूतियों को शामिल किया जाना चाहिए और इसके लिए संशोधन अनिवार्य है।

कंपनी ने कहा कि अगस्त 2018 में आइडिया सेल्युलर के साथ वोडाफोन इंडिया लिमिटेड और वोडाफोन मोबाइल सर्विसेस लिमिटेढ का अधिग्रहण होने के बाद नया संकल्प पारित किया जाना अनिवार्य है। यह कंपनी की कुल कर्ज लेने की क्षमता को कम करता है।

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सूचना के मुताबिक कंपनी ने कर्ज सीमा को बढ़ाकर एक लाख करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव किया जा रहा है। कंपनी का निदेशक मंडल किसी भी समय में कंपनी पर कुल कर्ज को एक लाख करोड़ रुपये या चुक्ता पूंजी, मुक्त भंडार और प्रीमियम प्रतिभूति खाते के कुल योग में जो भी अधिक होगा उससे ज्यादा को मंजूरी नहीं दे सकता है।

कंपनी इसके अलावा इंडस टावर्स और भारती इंफ्राटेल के साथ देशभर में मोबाइल टावरों को किराये पर देने के लिए 10 साल के मास्टर सर्विस समझौते पर भी शेयरधारकों से मंजूरी मांगेगी।भारती इंफ्राटेल और इंडस टावर्स विलय की प्रक्रिया में हैं।

कंपनी के निदेशक मंडल ने चार सितंबर को कर्ज या हिस्सेदारी बिक्री के जरिए 25,000 करोड़ रुपये की पूंजी जुटाने के प्रस्ताव को मंजूर किया था। एजीएम में शेयरधारकों से इस पर भी अनुमति ली जाएगी।

घाटे में चल रही वोडाफोन आइडिया पर कुल 1.12 लाख करोड़ रुपये का कर्ज है। इसके अलावा उच्चतम न्यायालय के आदेश के चलते उसे समायोजित सकल आय (एजीआर) से जुड़ा बकाया भी चुकाना है। सरकार का दावा है कि कंपनी पर 58,250 करोड़ रुपये एजीआर बकाया है जिसमें से उसने अब तक 7,854 करोड़ रुपये ही चुकाए हैं।

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