देश की खबरें | चारदीवारी को लेकर हिंसा के बाद विश्व भारती विश्वविद्यालय बंद, राज्यपाल की मुख्यमंत्री से बातचीत

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. पौष मेला मैदान में चारदीवारी के निर्माण के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन के बाद विश्व भारती विश्वविद्यालय को सोमवार को अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया गया।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

कोलकाता, 17 अगस्त पौष मेला मैदान में चारदीवारी के निर्माण के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन के बाद विश्व भारती विश्वविद्यालय को सोमवार को अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया गया।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि वह वहां किसी भी तरह का निर्माण नहीं चाहती हैं। राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने स्थिति पर चिंता प्रकट की।

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पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में सोमवार को विश्व भारती परिसर में हंगामा हुआ। बड़ी संख्या में यहां जुटे लोगों ने पौष मेला मैदान में चारदीवारी के निर्माण का विरोध करते हुए विश्वविद्यालय की संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया।

सूत्रों ने बताया कि और विश्वविद्यालय प्रशासन ने यहां चारदीवारी निर्माण का निर्णय लिया था जो आज सुबह शुरू हुआ।

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इस मेले का आयोजन सबसे पहले रबींद्रनाथ टैगोर के पिता महर्षि देबेन्द्रनाथ टैगोर ने 1894 में किया था।

हिंसक घटना के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस मामले को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संज्ञान में लाने का फैसला किया जो इस विश्वविद्यालय के कुलाधिपति हैं। विश्वविद्यालय ने स्थिति सुधरने तक परिसर को बंद रखने का निर्णय लिया है।

हालांकि प्रवेश, परीक्षा प्रक्रिया और आपात सेवाओं का ध्यान रखा जाएगा।

वैसे तो तृणमूल कांग्रेस सरकार ने हिंसा की निंदा की लेकिन मुख्यमंत्री ने कहा कि वह वहां किसी भी तरह का निर्माण नहीं चाहती हैं।

सूत्रों ने बताया कि करीब 4,000 लोग शांति निकेतन परिसर के पास पहुंचे और अचानक अंदर दाखिल हो गए। उन्होंने संपत्ति को नुकसान पहुंचाना शुरू कर दिया और जेसीबी की मदद से विश्वविद्यालय के एक दरवाजे को गिराना शुरू कर दिया।

हालांकि हंगामे के बाद चारदीवारी निर्माण का कार्य रोक दिया गया।

सूत्रों ने बताया कि मेले वाले मैदान में चारदीवारी की जरूरत है ताकि ‘बाहर के लोग’ यहां प्रवेश न कर सकें।

एक शताब्दी पुराने ‘पौष मेला’ का आयोजन इस साल से बंद करने के विश्व भारती के फैसले से नाराज स्थानीय कारोबारियों की एक इकाई ने शनिवार को विश्वविद्यालय प्रशासन को यहां चारदीवारी निर्माण करने से रोका था।

कारोबारी इकाई बोलपुर व्यवसायी समिति ने दावा किया कि वह पौष मेले का आयोजन करेगी। समिति का कहना है कि यह मेला शांति निकेतन की विरासत का हिस्सा है।

सामान्य तौर पर दिसंबर के अंत में बंगाली पौष महीने में पौष मेले का आयोजन होता है और इसमें हथकरघा, शिल्प, कला के प्रदर्शन के साथ-साथ संगीत उत्सव का आयोजन होता है।

विश्व भारती प्रशासन ने यह कहते हुए कि पिछले दो वर्षों से मेला आयोजित कराने का उसका अनुभव ‘बुरा रहा’ है, मेले को बंद करने का फैसला लिया। प्रशासन का कहना है कि इन दो सालों में उसे कारोबारियों से राष्ट्रीय हरित अधिकरण के दिशा-निर्देशों का पालन कराने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

विश्व भारती को केंद्रीय विश्वविद्यालय बताते हुए बनर्जी ने कहा कि पौष मेला मैदान पर हिंसा को लेकर सोमवार को उनकी राज्यपाल से बात हुई और उन्होंने राज्यपाल को बताया कि इस मामले में राज्य सरकार की ''सीमित'' भूमिका है।

बनर्जी ने कहा, '' राज्यपाल ने मुझे फोन किया था। मैदान पर हुई हिंसा को लेकर हमारी चर्चा हुई थी। मैंने उन्हें कहा कि नोबेल पुरस्कार विजेता रबींद्रनाथ टैगोर ने विभिन्न त्योहार मनाने के लिए इसकी स्थापना की थी। मैंने उन्हें यह भी बताया कि मैं उस मैदान पर किसी भी तरह का निर्माण नहीं चाहती हूं।''

उन्होंने कहा, '' इससे पहले भी परिसर में एक सेमिनार को लेकर समस्या हुई थी.... मैंने पुलिस अधीक्षक से कहा था कि वह विश्वविद्यालय अधिकारियों और स्थानीय प्रशासन की बैठक बुलाएं।''

विश्वविद्यालय में हुए हंगामे को लेकर राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने निराशा जतायी।

धनखड़ ने ट्वीट किया, '' विश्व भारती में कानून और व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक है। शिक्षा के मंदिर में शांति बनाए रखने के लिए मैं मुख्यमंत्री के संपर्क में हूं। कुलपति के मुताबिक कानून तोड़ने वाले परिसर में घुसे और संपत्ति को नुकसान पहुंचाया।''

उन्होंने कहा कि विश्व भारती की ओर से की गई कॉल पर पुलिस अधीक्षक और जिलाधिकारी समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रतिक्रिया नहीं दी।

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