देश की खबरें | वीजा घोटाला की जांच से कार्ति की संलिप्तता सामने आयी है: ईडी
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नयी दिल्ली, 12 जुलाई प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कथित चीनी वीजा घोटाले के मामले में कांग्रेस सांसद कार्ति पी चिदम्बरम की अग्रिम जमानत अर्जी का यह कहते हुए विरोध किया है कि अबतक की जांच में देश की सुरक्षा को खतरे में डालने वाले इस अपराध में उनकी संलिप्तता का खुलासा हुआ है।
ग्यारह जुलाई की अपनी स्थिति रिपोर्ट में जांच एजेंसी ने कहा कि यदि आरोपी को यह मालूम हो कि वह सुरक्षित है तो पूछताछ में सफलता हाथ नहीं लगेगी तथा आर्थिक अपराधों में अग्रिम जमानत से निश्चित ही प्रभावी जांच बाधित होगी।
उसने कहा कि जांच अब भी प्राथमिक चरण में है और इस चरण में यदि विवरण का खुलासा कर दिया गया तो उसे (जांच को) नुकसान पहुंचेगा क्योंकि कार्ति चिदम्बरम एक सांसद एवं बहुत प्रभावशाली व्यक्ति हैं । उसने अपील की कि जांच की यथास्थिति केस रिकार्ड से देखी जाए।
उसने कहा, ‘‘ ....वित्तीय फायदे के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने वाला यह वर्तमान अपराध बहत गंभीर आर्थिक अपराध है तथा अर्थव्यवस्था एवं समाज के लिए उसका बहुत विध्वसंक प्रभाव है।’’
ईडी ने इस कथित घोटाले के सिलसिले में कार्ति एवं अन्य के विरूद्ध धनशोधन का मामला दर्ज किया है। यह कथित घोटाला 2011 में 263 चीनी नागरिकों को वीजा जारी करने से जुड़ा है जब कार्ति चिदम्बरम के पिता पी चिदम्बरम गृहमंत्री थे।
दिल्ली उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति पूनम ए बाम्बा ने मंगलवार को कार्ति पी चिदम्बरम की अग्रिम जमानत अर्जी को 18 अगस्त को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया क्योंकि ईडी के वकील ने अदालत से कहा कि अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस वी राजू उपलब्ध नहीं हैं।
जांच एजेंसी (ईडी) ने मौखिक रूप से यह भी कहा कि कार्ति के विरूद्ध दंडात्मक कार्रवाई न करने को लेकर उसने जो आश्वासन दिया था, उसपर वह अगली तारीख तक कायम रहेगी।
ईडी ने 12 जून को उच्च न्यायालय को मौखिक आश्वासन दिया था कि 12 जुलाई तक कार्ति चिदम्बदम के विरूद्ध कोई जबरिया कार्रवाई नहीं की जाएगी।
कार्ति चिदम्बरम ने अपने वकील अर्शदीप सिंह के माध्यम से अग्रिम जमानत के लिए उच्च न्यायालय का रूख किया था, क्योंकि उससे पहले तीन जून को उनकी एवं दो अन्य की अग्रिम जमानत याचिका निचली अदालत ने इस आधार पर खारिज कर दी थी कि अपराध गंभीर किस्म का है।
अपनी स्थिति रिपोर्ट में ईडी ने यह भी कहा कि इस मामले में ईसीआईआर (प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट) कार्ति चिदम्बर को नहीं दी जा सकती है क्योंकि उसे देने का कानून में कोई प्रावधान नहीं है और यह कि गिरफ्तारी की आशंका इस समय बेबुनियाद है।
उसने समाज में बड़ी प्रतिष्ठा वाले व्यक्तियों के कानून की प्रक्रिया से बचने के लिए देश छोड़कर चले जाने का हवाला देते हुए कहा कि कार्ति चिदम्बरम के देश से भाग जाने की भी आशंका है और उनका आपराधिक इतिहास है क्योंकि उनके विरूद्ध करीब चार मामले लंबित हैं जिनकी जांच सीबीआई एवं ईडी द्वारा की जा रही है।
जांच एजेंसी ने कहा कि कार्ति चिदम्बरम गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं एवं सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर सकते हैं। ईडी ने राजनीतिक प्रतिशोध एवं दुर्भावना के आरोपों से इनकार किया और कहा कि ये ‘‘बेसिर-पैर की बातें’’ हैं।
ईडी ने पहले कहा था कि इस मामले में शोधित कालेधन की मात्रा का अभी जांच में निर्धारण किया जाना बाकी है तथा सीबीआई मामले में उल्लेखित 50 लाख रुपये की रिश्वत को इस मामले का आधार नहीं माना/समझा जा सकता है ।
उसने इस मामले में सीबीआई की प्राथमिकी का संज्ञान लेते हुए धनशोधन निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत अपना मामला दर्ज किया है।
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