गोपेश्वर (उत्तराखंड), 18 सितंबर पिछले 15 साल से सड़क बनने की बाट जोह रहे उत्तराखंड के चमोली जिले में नीति घाटी के दूरस्थ गांवों में से एक तोलमा के निवासियों ने उनके गांव की सड़क का निर्माण कार्य फिर से शुरू नहीं होने पर आंदोलन करने की चेतावनी सोमवार को दी।
तोलमा के ग्रामीणों ने यहां अपनी मांगों को लेकर लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता से भेंट की और उनके माध्यम से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को संबोधित एक ज्ञापन सौंपा। उन्होंने कहा कि अगर सड़क निर्माण का कार्य जल्द दोबारा शुरू नहीं किया गया तो वे जिला कलेक्ट्रेट में आंदोलन शुरू करने को बाध्य होंगे।
तोलमा में पिछले पंद्रह साल से चार किलोमीटर लंबी सड़क निर्माणाधीन है, लेकिन अभी तक गांव नहीं पहुंची है। सीमावर्ती इलाके के इस दूरस्थ गांव में सड़क नहीं होने के कारण आज भी गांववासियों को घर पहुंचने के लिए मीलों पैदल चलना पड़ रहा है।
जोशीमठ मलारी सीमा सड़क पर सुराईथोठा से इस गांव के लिए नवम्बर 2005 में चार किलोमीटर लंबी सड़क स्वीकृत हुई थी।
गांव की छाया देवी ने बताया कि डेढ़ दशक पहले सड़क निर्माण के लिए सुराईथोठा में जेसीबी आयी थी जिसने कुछ किलोमीटर तक खुदाई की लेकिन फिर अचानक काम बंद हो गया। आज भी हम सड़क बनने के इंतजार में हैं।
एक अन्य ग्रामीण उदय सिह ने बताया कि पिछले एक दशक से लोकनिर्माण विभाग के चक्कर काटते-काटते लोग थक गए हैं। उन्होंने कहा कि विभाग की ओर से हर बार अश्वासन मिलता है लेकिन सड़क का कार्य आगे नहीं बढ़ा है।
जिलाधिकारी और मुख्यमंत्री को अब तक भेजे पत्रों का पुलिंदा दिखाते हुए ग्रामीण आर एस बिष्ट ने बताया कि अर्जी लिखते—लिखते थक गए लेकिन सड़क जस की तस है।
नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क की सीमा से सटा होने के कारण इस गांव में दुनिया भर से शोधार्थी पहुंचते हैं। द्रोणागिरी पर्वत और द्रोणागिरी गांव भी इससे कुछ ही दूरी पर है और संजीवनी बूटी की खोज में वनस्पति विज्ञानी भी यदा कदा इस गांव में आते हैं ।
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