नयी दिल्ली, 30 जुलाई उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति एम. वेंकैया नायडू ने 2003 में दिल्ली के आर. के. पुरम इलाके में राज्यसभा सचिवालय को आवंटित 8,700 वर्ग मीटर जमीन पर दखल लेने में हो रही देरी पर बृहस्पतिवार को चिंता जतायी।
राज्यसभा सचिवालय, आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय, दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड, भूमि एवं विकास विभाग के अधिकारियों और अधिवक्ताओं के साथ भूमि आवंटन की स्थिति की समीक्षा के लिए आयोजित बैठक में सभापति ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे भूखंडों को अवैध कब्जे से मुक्त कराने के लिए तुरंत उचित कदम उठाएं।
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, राज्यसभा सचिवालय को आवंटित 8,700 वर्ग मीटर भूमि में से करीब 4,384.25 वर्ग मीटर पर तीन एनजीओ सहित विभिन्न संगठनों ने कब्जा कर रखा है।
बयान के अनुसार, जमीन के 1,193.54 वर्ग मीटर हिस्से में अवैध झुग्गियां भी बनी हुई हैं।
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सभापति ने कहा कि इस मामले में देरी हो रही है। उन्होंने उच्च न्यायालय में लंबित मामलों सहित सभी समस्याओं का उचित समाधान निकालने को कहा।
उन्होंने यह भी कहा कि 2003 में राज्यसभा ने जमीन की कीमत के रूप में और उस वक्त बनी झुग्गियों को दूसरी जगह बसाने के लिए 1.25 करोड़ रुपये खर्च किए थे।
बयान के अनुसार उन्होंने कहा कि राज्यसभा टीवी को अपने परिसर के लिए पहले साल में 30 करोड़ रुपये किराया भरना पड़ता था, हालांकि अब यह कम होकर 15 करोड़ रुपये हो गया है।
सभापति ने कहा कि लेकिन इस 15 करोड़ रुपये के वार्षिक वित्तीय बोझ से भी बचा जा सकता है जो भारी-भरकम है।
अधिकारियों का कहना है कि सभापति नायडू चाहते हैं कि जमीन पर दखल मिलने के साथ ही वहां राज्यसभा टीवी के कार्यालय और राज्यसभा सचिवालय के कर्मचारियों के लिए आवासों का निर्माण शुरू कर दिया जाए।
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