देश की खबरें | उपराष्ट्रपति धनखड़ ने ‘भारत विरोधी विमर्श’ का मुकाबला करने का आह्वान किया

नागपुर, चार अगस्त उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने ‘‘भारत विरोधी विमर्श’’ को बेअसर करने का आह्वान करते हुए कहा कि यह ऐसे समय में हो रहा है जब देश की वैश्विक प्रतिष्ठा अब तक के शीर्ष स्तर पर है।

विश्वविद्यालय के छात्रों और शिक्षकों समेत उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भारत लोकतंत्र की जननी है और दुनिया के किसी भी अन्य देश में भारत के समान संवैधानिक रूप से निर्मित प्रतिनिधि शासन प्रणाली नहीं है।

धनखड़ ने कहा कि लोकतंत्र में कोई भी कानून से ऊपर नहीं है और सभी को इसके अधीन रहना होगा, ‘‘लेकिन जब कानून अपना काम करता है और लोग सड़कों पर उतरते हैं, तो क्या इसे नजरअंदाज किया जा सकता है?’’

उपराष्ट्रपति राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय के शताब्दी समारोह के तहत आयोजित एक समारोह को संबोधित कर रहे थे।

भारत विरोधी विमर्श पर चिंता व्यक्त करते हुए, धनखड़ ने कहा, ‘‘क्या हम किसी को भी बिना किसी आधार के हमारे संवैधानिक संस्थानों को कलंकित करने, बदनाम करने और लांछन लगाने की अनुमति दे सकते हैं? यह ऐसे समय में हो रहा है जब पूरी दुनिया भारत के बारे में बात कर रही है और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने कहा है कि भारत निवेश और अवसरों के लिए एक पसंदीदा स्थान है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन, हममें से कुछ लोग उसपर सवाल करना चाहते हैं। हममें से कुछ लोग दूसरा दृष्टिकोण रखना चाहते हैं।’’

उपराष्ट्रपति ने कहा कि अब समय आ गया है कि लोग ‘‘भारत विरोधी विमर्श’’ को बेअसर करें, जो ऐसे समय में हो रहा है जब देश को उस तरह की वैश्विक प्रतिष्ठा और सम्मान प्राप्त है जो पहले नहीं देखी गई थी।

उपराष्ट्रपति ने कहा, ‘‘इतिहास में पहले कभी किसी भारतीय प्रधानमंत्री को इतना सम्मान नहीं मिला जितना अब नरेन्द्र मोदी को मिला है।’’

दुनिया के सबसे पुराने लोकतंत्र के रूप में भारत की सराहना करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘हमारा संविधान ग्राम स्तर, पंचायत स्तर और जिला स्तर पर लोकतंत्र प्रदान करता है। हमारे देश में लोकतांत्रिक मूल्य फलते-फूलते हैं।’’

धनखड़, जो राज्यसभा के सभापति भी हैं, ने कहा कि चर्चा में शामिल होना प्रत्येक संसद सदस्य की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा, ‘‘देश भर से प्रतिनिधि, जो समाज के हर वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं, संसद में आते हैं। बहस, संवाद, चर्चा में शामिल होना और कार्यवाही में व्यवधान से बचना उनकी जिम्मेदारी है।’’

धनखड़ ने कहा, भारत शिष्टतापूर्ण असहमति, बहस और चर्चा की परंपरा के लिए जाना जाता है। उन्होंने कहा, ‘‘असहमति में भी मर्यादा रखनी होती है। लोकतंत्र के स्वस्थ कामकाज के लिए शिष्टता और व्यवस्था आवश्यक शर्तें हैं।’’

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