देश की खबरें | 1947 में पाक सैनिकों को खदेड़ने के लिए सेना के कश्मीर पहुंचने की याद में ‘शौर्य दिवस’ आयोजित

श्रीनगर, 27 अक्टूबर सेना ने कश्मीर से पाकिस्तानी सैनिकों को खदेड़ने के लिए बलों के यहां पहुंचने की 76वीं सालगिरह के मौके पर शुक्रवार को ‘शौर्य दिवस’ मनाया। इन बलों ने आजाद भारत में सेना की पहली विजय सुनिश्चित की थी।

कश्मीर के तत्कालीन महाराजा हरि सिंह और भारत गणराज्य के बीच विलय पत्र पर हस्ताक्षर होने के एक दिन बाद भारतीय सेना की टुकड़ियां जम्मू-कश्मीर से पाकिस्तानी सेना को खदेड़ने के लिए बडगाम हवाई अड्डे पर उतरी थीं।

शुक्रवार को आयोजित ‘शौर्य दिवस’ में वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि देने के लिए उस ऐतिहासिक घटना की प्रतिकृति प्रस्तुत की गई।

इस कार्यक्रम में सेना और वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा छात्र शामिल हुए। इस कार्यक्रम में पाकिस्तानी सेना को खदेड़ने के लिए भारतीय सेना के जवानों के 27 अक्टूबर 1947 को वहां पहुंचने को भी प्रदर्शित किया गया।

इस अवसर पर सेना की श्रीनगर स्थित 15वीं कोर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग (जीओसी) लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने कहा कि यह आयोजन उस ऐतिहासिक दिन की याद में किया जाता है, जिसने यह सुनिश्चित किया कि जम्मू कश्मीर अब भी भारत का अभिन्न अंग है।

उन्होंने कहा कि सेना ने आजाद भारत में अपने पहले बड़े अभियान में साहस का परिचय दिया और कश्मीर को पाकिस्तान के कब्जे में जाने से बचाकर दुश्मन के नापाक इरादों को नाकाम कर दिया।

लेफ्टिनेंट जनरल घई ने पहला परमवीर चक्र प्राप्त करनेवाले मेजर सोमनाथ शर्मा की वीरता को याद किया, जिन्होंने घायल होने के बावजूद एक कंपनी का नेतृत्व किया और श्रीनगर एयरफील्ड को पाकिस्तानी कबायलियों के कब्जे में नहीं जाने दिया। मेजर शर्मा इस दौरान वीरगति को प्राप्त हुए थे।

उन्होंने कहा, ‘‘आज हमें प्रण करना चाहिए कि हम कश्मीर को शांति और समृद्धि के रास्ते पर ले जाने का कोई प्रयास विफल नहीं होने देंगे।’’

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