देश की खबरें | उत्तराखंड सरकार ने चारधाम देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड भंग किया, पुरोहितों ने किया स्वागत
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देहरादून, 30 नवंबर लंबे समय से आंदोलनरत तीर्थ पुरोहितों की मांग को मानते हुए उत्तराखंड सरकार ने मंगलवार को विवादास्पद चारधाम देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड को भंग कर दिया।
अस्तित्व में आने के ठीक दो साल बाद देवस्थानम बोर्ड के भंग होने का जहां तीर्थ पुरोहितों और साधु संतों ने स्वागत किया। वहीं, मुख्य विपक्षी कांग्रेस ने इसे आगामी विधानसभा चुनावों में हार के डर से लिया गया फैसला बताया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ट्वीट किया,‘‘ आप सभी की भावनाओं, तीर्थपुरोहितों, हक-हकूकधारियों के सम्मान एवं चारधाम से जुड़े सभी लोगों के हितों को ध्यान में रखते हुए श्री मनोहर कांत ध्यानी जी की अध्यक्षता में गठित उच्च स्तरीय कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने देवस्थानम बोर्ड अधिनियम वापस लेने का फैसला किया है।’’
इससे पहले, ध्यानी समिति ने रविवार शाम को अपनी अंतिम रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपी थी जिसका उन्होंने परीक्षण कर जल्द निर्णय लेने की बात कही थी।
चारों हिमालयी धामों-बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री के तीर्थ पुरोहितों के देवस्थानम बोर्ड को भंग करने को लेकर लंबे समय से चल रहे आंदोलन के मद्देनजर धामी ने सत्ता संभालते ही भाजपा नेता ध्यानी की अध्यक्षता में समिति का गठन किया था।
बोर्ड के गठन को अपने पारंपरिक अधिकारों का हनन बताते हुए चारों धामों के तीर्थ पुरोहित इसे भंग करने की मांग को लेकर लंबे समय से आंदोलन चला रहे थे। निकट आ रहे विधानसभा चुनावों को देखते हुए उन्होंने आंदोलन तेज करने की धमकी दी थी। धामी सरकार के इस निर्णय को इसी संदर्भ में देखा जा रहा है ।
देवस्थानम अधिनियम पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के सरकार के कार्यकाल में दिसंबर 2019 में पारित हुआ था जिसके तहत चारों धाम सहित प्रदेश के 51 मंदिरों के प्रबंधन के लिए जनवरी, 2020 में बोर्ड का गठन किया गया था।
तीर्थ पुरोहितों ने बोर्ड के भंग होने के निर्णय पर खुशी व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री का आभार जताया। लेकिन कहा कि यह उनके संघर्ष का परिणाम है। चारधाम तीर्थ पुरोहित हक हकूकधारी महापंचायत के प्रवक्ता ब्रजेश सती ने कहा, ‘‘यह एक ऐतिहासिक निर्णय है। यह भारतीय लोकतंत्र की एक अनूठी घटना है जहां जनता के दवाब में एक सरकार को अपना ही निर्णय वापस लेना पड़ा।’’
अखिल भारतीय अखाडा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी ने भी फैसले का स्वागत किया और कहा कि सरकार ने यह एक अच्छा काम किया है।
उधर, कांग्रेस महासचिव और प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि अहंकार की एक बार फिर हार हुई है। उन्होंने कहा, ‘‘ तीन कृषि कानूनों के मामले की तरह ही अहंकार एक बार फिर पराजित हुई है। आने वाले चुनावों में हार से भयभीत होकर भाजपा सरकार ने यह निर्णय लिया है। यह तीर्थ पुरोहितों की जीत है जो अपनी मांगों को लेकर डटे रहे। मैं उन्हें बधाई देता हूं।’’
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(The above story first appeared on LatestLY on Nov 30, 2021 03:52 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

