प्रयागराज, 29 जनवरी इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने जान की सुरक्षा की मांग वाली आठ हिंदू-मुस्लिम दंपतियों की याचिकाएं खारिज कर दी हैं।
अदालत ने कहा कि इन दंपतियों की शादियां उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप नहीं हैं।
यह कानून वर्ष 2021 में पारित किया गया था जो कि बहला-फुसला कर, बलपूर्वक, धोखाधड़ी, अनुचित प्रभाव, दबाव और प्रलोभन के जरिए एक धर्म से दूसरे धर्म में गैर कानूनी परिवर्तन को रोकता है।
इन दंपतियों ने अलग-अलग याचिकाएं दायर कर अपनी सुरक्षा और वैवाहिक जीवन में हस्तक्षेप नहीं करने का निर्देश जारी करने की मांग की थी। अदालत ने 10 जनवरी से 16 जनवरी 2024 के बीच इन याचिकाओं को खारिज कर दिया।
न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव ने कहा कि ये अंतरधार्मिक विवाह के मामले हैं, लेकिन ये विवाह स्वयं में कानून के मुताबिक नहीं हैं क्योंकि धर्म परिवर्तन रोधी कानून का पालन नहीं किया गया।
अदालत के समक्ष आए इन आठ मामलों में पांच मुस्लिम पुरुषों ने हिंदू महिलाओं से विवाह किया था और तीन हिंदू पुरुषों ने मुस्लिम महिलाओं के साथ विवाह किया था। अदालत ने आदेशों में याचिकाकर्ताओं के धर्मों का उल्लेख किया है।
अदालत ने इन याचिकाकर्ताओं के अनुरोध को खारिज करते हुये अपने आदेश में कहा, ‘‘ तथ्यों को देखते हुए याचिकाकर्ताओं द्वारा मांगी गई राहत प्रदान नहीं की जा सकती। ऐसे में ये रिट याचिकाएं खारिज की जाती हैं।’’
हालांकि, अदालत ने याचिकाकर्ताओं से कहा कि यदि वे उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए विवाह करते हैं तो नये सिरे से रिट याचिका दायर कर सकते हैं।
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