उन्नाव बलात्कार पीड़िता के पिता की मौत: अदालत ने कुलदीप सेंगर की याचिका पर सीबीआई से जवाब मांगा
दिल्ली उच्च न्यायालय ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से निष्कासित नेता कुलदीप सिंह सेंगर की उस याचिका पर मंगलवार को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जवाब मांगा जिसमें उन्नाव बलात्कार पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत के मामले में उन्हें दी गई 10 साल की जेल की सजा को चिकित्सा आधार पर निलंबित करने का अनुरोध किया गया है.
नयी दिल्ली, 3 दिसंबर : दिल्ली उच्च न्यायालय ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से निष्कासित नेता कुलदीप सिंह सेंगर की उस याचिका पर मंगलवार को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जवाब मांगा जिसमें उन्नाव बलात्कार पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत के मामले में उन्हें दी गई 10 साल की जेल की सजा को चिकित्सा आधार पर निलंबित करने का अनुरोध किया गया है. उच्च न्यायालय ने जेल अधिकारियों से सेंगर की चिकित्सा स्थिति पर एक रिपोर्ट दाखिल करने को भी कहा और याचिका को अगले साल 13 जनवरी को आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया. न्यायमूर्ति मनोज कुमार ओहरी ने कहा, ‘‘नोटिस केवल चिकित्सा आधार तक ही सीमित है.’’ सीबीआई के वकील ने अदालत को बताया कि उच्च न्यायालय ने इस वर्ष जून में सेंगर की दोषसिद्धि के खिलाफ अपील लंबित रहने तक उनकी सजा को निलंबित करने से इनकार कर दिया था.
सेंगर के वकील ने कहा कि वह चिकित्सा आधार पर सजा को निलंबित करने का अनुरोध कर रहे हैं, क्योंकि उनका स्वास्थ्य बिगड़ रहा है और यह चिकित्सा के लिहाज से एक गंभीर स्थिति है. उन्होंने कहा कि निचली अदालत के दोषसिद्धि और सजा के आदेश को चुनौती देने वाली सेंगर की अपील पर लंबे समय से सुनवाई नहीं हुई है और वह पिछले आठ वर्ष से जेल में है, जबकि इस मामले में सेंगर को अधिकतम 10 साल की सजा दी गई थी. सेंगर को पहले ही पीड़ित की नाबालिग बेटी से बलात्कार का दोषी ठहराया जा चुका है और उस मामले में उसे जीवन पर्यंत कारावास की सजा सुनाई गई है. मुख्य उन्नाव बलात्कार मामले में निचली अदालत के फैसले को चुनौती देने वाली सेंगर की अपील पहले से ही उच्च न्यायालय में लंबित है. यह भी पढ़ें : लोस अध्यक्ष ने कहा कि सदन में दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए संबंधित मंत्रियों को सदन में रहना चाहिए
उन्होंने 16 दिसंबर, 2019 को निचली अदालत के उस फैसले को रद्द करने का अनुरोध किया है, जिसमें उन्हें बलात्कार के मामले में दोषी ठहराया गया था. सेंगर ने 20 दिसंबर, 2019 को उन्हें जीवन पर्यंत कारावास की सजा सुनाए जाने के आदेश को भी रद्द करने का अनुरोध किया है. सेंगर ने 2017 में पीड़ित का अपहरण कर उससे बलात्कार किया था. घटना के वक्त वह नाबालिग थी. 13 मार्च, 2020 को निचली अदालत ने सेंगर को बलात्कार पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत के मामले में 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई और 10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया. निचली अदालत ने कहा था कि परिवार के ‘‘एकमात्र कमाने वाले’’ की हत्या के लिए ‘‘कोई नरमी’’ नहीं बरती जा सकती. अदालत ने बलात्कार पीड़िता के पिता की हिरासत में हत्या में भूमिका के लिए सेंगर के भाई अतुल सिंह सेंगर और पांच अन्य लोगों को भी 10 साल की जेल की सजा सुनाई थी. लड़की के पिता को सेंगर के इशारे पर शस्त्र अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया गया था और पुलिस के उत्पीड़न के कारण नौ अप्रैल, 2018 को हिरासत में उनकी मौत हो गई थी.
(The above story first appeared on LatestLY on Dec 03, 2024 01:02 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

