देश

'Vande Mataram' पर सियासी घमासान: कांग्रेस के फैसले के खिलाफ BJP ने पास किया प्रस्ताव, पूरे देश में चलाएगी अभियान

राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस के बीच राजनीतिक विवाद और गहरा गया है. 22 अगस्त 2026 को भारतीय जनता पार्टी ने एक औपचारिक प्रस्ताव पारित कर कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) के उस फैसले की कड़ी निंदा की,

'Vande Mataram' पर सियासी घमासान: कांग्रेस के फैसले के खिलाफ BJP ने पास किया प्रस्ताव, पूरे देश में चलाएगी अभियान

Vande Mataram Row: राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस के बीच राजनीतिक विवाद और गहरा गया है. 22 अगस्त 2026 को भारतीय जनता पार्टी ने एक औपचारिक प्रस्ताव पारित कर कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) के उस फैसले की कड़ी निंदा की, जिसमें पार्टी कार्यक्रमों में 'वंदे मातरम' की केवल पहली दो पंक्तियों को गाने का निर्णय लिया गया था. बीजेपी ने इस कदम को "तुष्टिकरण की राजनीति" करार देते हुए स्पष्ट किया है कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित सभी छह छंद भारत की राष्ट्रीय चेतना और स्वतंत्रता संग्राम की विरासत का अभिन्न अंग हैं.

इस विवाद का जवाब देने और जनता के बीच राष्ट्रगीत के संवैधानिक व सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित करने के लिए सत्तारूढ़ पार्टी ने एक राष्ट्रव्यापी जागरूकता अभियान शुरू करने की घोषणा की है.

कांग्रेस का रुख और ऐतिहासिक संदर्भ

यह पूरा विवाद कांग्रेस कार्यसमिति की 19 अगस्त को हुई बैठक के बाद सामने आया. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की बैठक में आधिकारिक कार्यक्रमों के दौरान 'वंदे मातरम' के केवल शुरुआती दो पदों को ही गाने का निर्णय लिया गया.

कांग्रेस नेतृत्व के अनुसार, यह फैसला पार्टी के अक्टूबर 1937 के ऐतिहासिक कोलकाता प्रस्ताव पर आधारित है. उस समय रवींद्रनाथ टैगोर, महात्मा गांधी और पंडित जवाहरलाल नेहरू जैसे नेताओं की सलाह पर सर्वसमावेशी माहौल बनाए रखने के उद्देश्य से राष्ट्रगीत के केवल प्रथम दो छंदों को ही आधिकारिक बैठकों में गाने की परंपरा तय की गई थी.

बीजेपी का राष्ट्रव्यापी जागरूकता अभियान

कांग्रेस के इस कदम का विरोध करते हुए बीजेपी ने "वोट-बैंक राजनीति" और सांप्रदायिक दबाव का मुकाबला करने का संकल्प लिया है. बीजेपी पदाधिकारियों के अनुसार, घोषित अभियान का मुख्य उद्देश्य युवा पीढ़ी को 'वंदे मातरम' की पूरी रचना, इसके इतिहास और इसके देशभक्तिपूर्ण पृष्ठभूमि से अवगत कराना है.

इस जनसंपर्क कार्यक्रम के तहत देशभर में शैक्षणिक और सांस्कृतिक पहलों के जरिए राष्ट्रगीत की पूरी छह पंक्तियों के गौरव को सामने लाया जाएगा.

ऐतिहासिक दृष्टिकोण और दोनों दलों के तर्क

इस विवाद के केंद्र में दोनों दलों के अलग-अलग ऐतिहासिक दृष्टिकोण हैं. एक ओर कांग्रेस अपने 1937 के रुख को समावेशिता और स्वतंत्रता सेनानियों के सर्वसम्मत फैसले का हिस्सा मानती है, तो दूसरी ओर बीजेपी का कहना है कि राष्ट्रगीत को खंडित रूप में प्रस्तुत करना राष्ट्रीय धरोहर का अनादर करना है. बीजेपी नेतृत्व का मानना है कि इस प्रकार के प्रतिबंध से देश के गौरवशाली इतिहास और इसकी पूर्ण चेतना के साथ समझौता होता है.

(The above story first appeared on LatestLY on Aug 22, 2026 02:13 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).