देश की खबरें | केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और दिल्ली सरकार झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई करे : न्यायाधिकरण

नयी दिल्ली, 13 जून मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (एमएसीटी) ने यहां केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और दिल्ली सरकार से डॉक्टरों के सत्यापन के लिए एक उचित तंत्र तैयार करने और ‘‘स्वयं को योग्य डॉक्टरों के रूप में पेश करने और दुर्घटना पीड़ितों का गलत तरीके से इलाज करने वाले झोलाछाप डॉक्टरों’’ के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा है।

न्यायाधिकरण ने एक दुर्घटना के मामले में मुआवजा देते हुए एक झोलाछाप डॉक्टर के खिलाफ पुलिस कार्रवाई के लिए भी कहा, जिसने पीड़ित को दवा दी और फर्जी मेडिकल बिल भी जारी किया।

एमएसीटी की पीठासीन अधिकारी एकता गौबा मान पीड़ित दीपक कुमार द्वारा दायर दावा याचिका पर सुनवाई कर रही थीं, जिन्हें मई 2013 में एक दुर्घटना में दाहिने ऊपरी अंग में 52 प्रतिशत दिव्यांगता का सामना करना पड़ा था।

न्यायाधिकरण ने नौ जून को पारित एक फैसले में ‘नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड’ को पीड़ित को मुआवजे के रूप में 31.71 लाख रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया।

उसने कहा कि इस आदेश की प्रति केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ-साथ दिल्ली के स्वास्थ्य विभाग को भी इस निर्देश के साथ भेजी जाये कि वे सत्यापन के लिए एक उचित तंत्र बनाने और झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई करना सुनिश्चित करेंगे।

इसने कहा कि आदेश की एक प्रति मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट (सीएमएम) को भेजी जाए, जिसमें प्रशांत विहार के एसएचओ को झोलाछाप डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।

न्यायाधिकरण ने कहा कि कुमार के असली मेडिकल बिल की जांच करने पर पता चला कि कुमार का इलाज करने वाले डॉक्टर की करीब सात साल पहले मौत हो गई थी।

इसने कहा, ‘‘यह बहुत ही अजीब तथ्य है कि याचिकाकर्ता का इलाज 15 मई 2013 से 16 अक्टूबर 2013 तक डॉक्टर द्वारा किया गया था... लेकिन उक्त डॉक्टर का सात साल से अधिक समय पहले निधन हो गया था।’’

न्यायाधिकरण ने कहा कि अगर किसी दुर्घटना के शिकार व्यक्ति को गंभीर चोटें आई हैं और उसे अस्पताल या क्लीनिक ले जाया गया और डॉक्टर झोलाछाप निकला और उस व्यक्ति को गलत उपचार दिया गया।

इसने कहा, ‘‘यह सबसे खतरनाक कृत्य है। इससे कड़ाई से निपटने की जरूरत है क्योंकि झोलाछाप डॉक्टर दुर्घटना पीड़ितों के जीवन के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।’’

मामले की अगली सुनवाई नौ जुलाई को होगी।

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