विदेश की खबरें | यूनिसेफ ने अफगान शिक्षा क्षेत्र से अंतरराष्ट्रीय संगठनों को प्रतिबंधित करने के तालिबान के कदम पर चिंता जताई
श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

यह देश में संचालित गैर सरकार संगठनों (एनजीओ) पर लगाया गया हालिया प्रतिबंध है। इससे पहले दिसंबर में अफगान महिला कर्मियों पर प्रतिबंध लगाया गया था क्योंकि वे कथित रूप से हिजाब नहीं पहन रही थीं और वे कार्यस्थल पर लैंगिक अलगाव के नियम का पालन नहीं कर रही थीं। अप्रैल में इस प्रतिबंध का दायर बढ़ाकर संयुक्त राष्ट्र के संस्थाओं को भी इसमें शामिल किया गया था।

काबुल में संभवत: शिक्षा विभाग से जुड़े एक अधिकारी ने व्हाट्सएप पर भजे वॉयस नोट में कहा कि सभी अंतरराष्ट्रीय संगठनों को अपने शैक्षणिक कार्य स्थानीय संगठनों को सौंपने के लिए एक महीने का वक्त दिया जाता है।

शिक्षा मंत्रालय इस वॉयस नोट की पुष्टि के लिए तत्काल उपलब्ध नहीं हो पाया लेकिन सहायक एजेंसी के अधिकारियों ने नाम नहीं बताने की शर्त पर एसोसिएटेड प्रेस (एपी) को बताया कि वे इस संदेश से परिचित हैं और इसे गंभीरता से ले रहे हैं।

संयुक्त राष्ट्र संस्था में अफगान महिला कर्मियों के कार्य करने पर प्रतिबंध के बारे में भी सूचना व्हाट्सएप वॉयस नोट के जरिए मिली थी जो संभवत: किसी वरिष्ठ तालिबानी नेता की आवाज थी।

एजेंसी ने एक बयान में कहा, ‘‘अफगानिस्तान में शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी एजेंसी के रूप में यूनिसेफ इस तरह की रिपोर्ट से चिंतित है कि अगर अंतरराष्ट्रीय गैर सरकारी संगठनों को शिक्षा के क्षेत्र में काम करने की अनुमति नहीं दी जाती है और समुचित आकलन तथा क्षमता निर्माण के बिना राष्ट्रीय एनजीओ को कार्यभार सौंपा जाता है तो 3,00,000 लड़कियों सहित 5,00,000 बच्चे एक महीने के भीतर समुदाय आधारित शिक्षा के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से वंचित हो जाएंगे।’’

यूनिसेफ के शिक्षण गतिविधियों में 5,000 महिलाओं समेत करीब 17,000 शिक्षक काम करते हैं।

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