
यूनिसेफ ने यह अपील ऐसे समय में की है जब अफगानिस्तान में नया अकादमिक वर्ष शुरू हुआ है।
एजेंसी ने कहा कि इस प्रतिबंध के कारण 4,00,000 और लड़कियां शिक्षा के अधिकार से वंचित हो गई हैं तथा इसी के साथ ऐसी लड़कियों की कुल संख्या 22 लाख हो गई है जो छठी कक्षा के बाद पढ़ नहीं सकीं।
अफगानिस्तान दुनिया का एकमात्र ऐसा देश है जहां लड़कियों की माध्यमिक और उच्च शिक्षा पर प्रतिबंध है। तालिबान के अनुसार यह प्रतिबंध उचित है क्योंकि यह शिक्षा व्यवस्था शरिया या इस्लामी कानून की व्याख्या के अनुरूप नहीं है।
यूनिसेफ की कार्यकारी निदेशक कैथरीन रसेल ने एक बयान में कहा, ‘‘तीन साल से अधिक समय से अफगानिस्तान में लड़कियों के अधिकारों का उल्लंघन किया जा रहा है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘सभी लड़कियों को अब स्कूल लौटने की अनुमति दी जानी चाहिए। अगर इन सक्षम एवं प्रतिभाशाली युवतियों को शिक्षा से वंचित रखा जाता रहा तो इसके परिणाम कई पीढ़ियों तक रहेंगे।’’
उन्होंने कहा कि इस प्रतिबंध से लाखों अफगान लड़कियों के भविष्य को नुकसान पहुंचेगा।
उन्होंने कहा कि यदि प्रतिबंध 2030 तक जारी रहता है, तो ‘‘40 लाख से अधिक लड़कियां प्राथमिक स्कूल से आगे की शिक्षा के अपने अधिकार से वंचित हो जाएंगी।’’
उन्होंने कहा कि इसके परिणाम ‘‘विनाशकारी’’ होंगे।
रसेल ने चेतावनी दी कि महिला चिकित्सकों और दाइयों की संख्या में कमी के कारण महिलाओं एवं लड़कियों को चिकित्सकीय देखभाल नहीं मिल पाएगी जिसके परिणामस्वरूप करीब 1,600 अतिरिक्त माताओं और 3,500 से अधिक अतिरिक्त शिशुओं की मौत होने की आशंका है।
उन्होंने कहा, ‘‘ये केवल संख्याएं नहीं हैं, ये आंकड़े खोई हुई जिंदगियों और बिखरते परिवारों का प्रतिनिधित्व करते हैं।’’
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