विदेश की खबरें | युगांडा: सीमावर्ती शहर में हुए नरसंहार में मारे गए लोगों को दफनाने की प्रक्रिया शुरू
श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

मपोंडवे-लुबिरिहा के महापौर सेलेवेस्ट मापोज ने बताया कि युगांडा-कांगो सीमा के पास एक माध्यमिक विद्यालय पर संदिग्ध विद्रोहियों के हमले में 38 छात्र मारे गए। उन्होंने बताया कि हमले में घायल हुए आठ लोगों में से एक और व्यक्ति की मौत हो गई।

उन्होंने बताया कि अधिकतर मृतकों के परिजन शव लेने मुर्दाघर आए।

पीड़ितों में 38 छात्रों के अलावा स्कूल का एक सुरक्षाकर्मी और तीन आम नागरिक शामिल हैं। इनमें से दो एक ही परिवार के सदस्य थे। उनके शवों को रविवार को दफनाया गया। दफनाए गए कुछ छात्रों के शव इतनी बुरी तरह घायल थे कि उनकी पहचान नहीं हो पा रही थी।

विद्रोहियों ने कांगो की सीमा से मात्र दो किलोमीटर दूर स्थित लुबिरिहा सेकेंडरी स्कूल पर बंदूकों एवं अन्य हथियारों से हमला किया और लोगों को जलाकर, गोली मारकर या चाकू से गोदकर उनकी हत्या कर दी।

युगांडा के प्राधिकारियों का मानना है कि शुक्रवार रात विद्रोहियों ने हमला कर कम से कम छह लोगों को अगवा किया और बाद में वे कांगो भाग गये।

संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने इस हमले की निंदा की है। उन्होंने कांगो और युगांडा के बीच सीमा पार असुरक्षा से निपटने और क्षेत्र में स्थायी शांति बहाल करने के लिए, बढ़ी हुई क्षेत्रीय साझेदारी के माध्यम से सामूहिक प्रयासों को बढ़ाने का आग्रह किया।

मपोंडवे-लुबिरिहा शहर में रविवार को माहौल तनावपूर्ण, किंतु शांत रहा। युगांडा के सुरक्षाबल स्कूल के बाहर और पास की सड़कों पर गश्त लगाते हुए देखे जा सकते थे।

इस हमले के लिए ‘एलाइड डेमोक्रेटिक फोर्सेस’ (एडीएफ) को दोषी ठहराया जा रहा है, जो अकसर हमलों की जिम्मेदारी नहीं लेता है। उसके इस्लामिक स्टेट समूह के साथ संबंध हैं।

युगांडाई राष्ट्रपति योवेरी मुसेवेनी ने इस घटना पर पहली बार रविवार को बयान देते हुए इसे ‘‘आपराधिक, हताशा में किया गया, आतंकवादी और निरर्थक’’ हमला बताया तथा सीमा पर और बलों को तैनात करने का संकल्प लिया।

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