विदेश की खबरें | भारत के दो कृषि विशेषज्ञ 2021 की खाद्य शिखर वार्ता के लिए वैज्ञानिक समूह में नामित

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. भारतीय मूल के दो प्रख्यात कृषि विशेषज्ञों को एक अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक समूह के सदस्यों के तौर पर नामित किया है जिस समूह का लक्ष्य टिकाऊ खाद्य प्रणालियों के लिए सर्वश्रेष्ठ वैज्ञानिक साक्ष्य उपबल्ध कराना है।

संयुक्त राष्ट्र, एक जुलाई भारतीय मूल के दो प्रख्यात कृषि विशेषज्ञों को एक अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक समूह के सदस्यों के तौर पर नामित किया है जिस समूह का लक्ष्य टिकाऊ खाद्य प्रणालियों के लिए सर्वश्रेष्ठ वैज्ञानिक साक्ष्य उपबल्ध कराना है।

संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख एंतोनियो गुतारेस ने अगले साल वैश्विक खाद्य शिखर सम्मेलन से पहले इस समूह की स्थापना की है।

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संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता द्वारा जारी बयान में कहा गया कि गुतारेस द्वारा नामित वैज्ञानिक समूह के सदस्यों में ओहियो स्टेट यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर रतन लाल और कृषि अर्थशास्त्रियों के अंतरराष्ट्रीय गठबंधन (आईएएई) की डॉ उमा लेले शामिल हैं।

प्रख्यात भारतीय-अमेरिकी मृदा वैज्ञानिक लाल को प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रखते हुए खाद्य उत्पादन बढ़ाने के लिए मिट्टी केंद्रित पद्धति विकसित करने और उसे मुख्यधारा में शामिल करने के लिए पिछले महीने 2020 के विश्व खाद्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

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वहीं लेले ऐली पहली महिला हैं जिन्हें कोरनेल विश्वविद्यालय द्वारा कृषि अर्थशास्त्र में पीएचडी उपाधि दी गई है और जिन्हें जुलाई 2018 में अंतरराष्ट्रीय कृषि अर्थशास्त्रियों के संगठन का अध्यक्ष चुना गया था।

लेले की वेबसाइट पर उपलब्ध उनकी प्रोफाइल के मुताबिक उन्हें विश्व बैंक, विश्वविद्यालयों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों में अनुसंधान, नीति विश्लेषण और आकलन में पांच दशक का अनुभव प्राप्त है।

गुतारेस संयुक्त राष्ट्र की रोम स्थित एजेंसियों के साथ साझेदारी में 2021 में खाद्य प्रणाली शिखर वार्ता बुलाएंगे जो सतत विकास लक्ष्यों और 2030 एजेंडा की पूर्ति के लिए ‘डिकेड ऑफ एक्शन’ में महत्त्वपूर्ण योगदान देगा।

शिखर सम्मेलन का लक्ष्य खाद्य प्रणाली की चुनौतियों को समझने के लिए वैश्विक जागरुकता बढ़ाना, राष्ट्रों द्वारा भोजन का उत्पादन, प्रसंस्करण और उपभोग करने के बारे में वैश्विक विमर्श शुरू करना तथा सभी के लिए सुरक्षित, पोषक भोजन उपलब्ध कराने हेतु वैश्विक कार्यों एवं प्रतिबद्धताओं को प्रेरित करना है।

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