इस तरह की अन्य चालों में स्थानीय चुनाव अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से तलब करना शामिल है।
चुनाव विशेषज्ञों का मानना है कि यह ट्रंप के प्रचार अभियान की ओर से एक आखिरी कोशिश है, लेकिन बाइडन जनवरी में ओवल कार्यालय में निश्चित रूप से पहुंचेंगे।
इस बात को लेकर बहुत चिंता है कि ट्रंप का प्रयास अमेरिकी चुनावों की निष्पक्षता में जनता के विश्वास को वास्तव में नुकसान पहुंचा रहा है।
ट्रंप के मुखर आलोचक सीनेटर मिट रोमनी ने ट्रंप पर जनता की इच्छा और चुनाव परिणाम को पलटने की कोशिश में राज्य के और स्थानीय अधिकारियों पर दबाव डालने का आरोप लगाया।
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रोमनी ने कहा, ‘‘किसी मौजूदा अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा इतनी अलोकतांत्रिक कार्रवाई की कल्पना करना भी मुश्किल है।’’
लोयोला लॉ स्कूल के प्रोफेसर और संविधान के जानकार जस्टिन लेविट ने कहा, ‘‘यह इस तरह के हालात पैदा करने वाली बात है, जहां देश की आधी आबादी मानती हो कि दो ही संभावनाएं हैं, या तो वे जीतेंगे या चुनाव में धांधली हुई है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘और यह लोकतंत्र नहीं है।’’
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