जरुरी जानकारी | भारत की राजकोषीय स्थिति में मजबूती की प्रवृत्ति बरकरार, राजस्व में उछाल की उम्मीद: मूडीज

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. साख तय करने वाली और शोध कंपनी मूडीज इनवेस्टर्स सर्विस ने मंगलवार को कहा कि भारत के लिये धीरे-धीरे राजकोष के स्तर पर मजबूती का रुख बरकरार है और आने वाले समय में राजस्व के साथ कर्ज के स्थिर होने के मामले में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है।

नयी दिल्ली, 22 नवंबर साख तय करने वाली और शोध कंपनी मूडीज इनवेस्टर्स सर्विस ने मंगलवार को कहा कि भारत के लिये धीरे-धीरे राजकोष के स्तर पर मजबूती का रुख बरकरार है और आने वाले समय में राजस्व के साथ कर्ज के स्थिर होने के मामले में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है।

मूडीज इनवेस्टर्स सर्विस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष क्रिश्चियन डी गुजमैन ने कहा कि भारत की ‘बीएए3’ साख अपेक्षाकृत उच्च आर्थिक वृद्धि और उभरते बाजारों में अत्यधिक कर्ज की स्थिति को संतुलित करती है। भारतीय कंपनियों के कर्ज में कमी की स्थिति देश की मजबूत वित्तीय प्रणाली को बताती है।

उन्होंने मूडीज के ‘ऑनलाइन’ आयोजित कार्यक्रम ‘सॉवरेन डीप डाइव’ में कहा, ‘‘हमारा अनुमान है कि भारत अगले साल जी-20 में तीव्र आर्थिक वृद्धि हासिल करने वाला देश होगा...हालांकि उच्च महंगाई दर देश की वृद्धि दर के रास्ते में जोखिम है क्योंकि मुद्रास्फीति से परिवार और कंपनियों की क्रय शक्ति कम होगी।’’

मूडीज ने इस महीने की शुरूआत में 2022 के लिये भारत की आर्थिक वृद्धि के अनुमान को 7.7 प्रतिशत से घटाकर 7.0 प्रतिशत कर दिया। साथ ही 2023 में इसके घटकर 4.8 तथा 2024 में बढ़कर करीब 6.4 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। भारत की आर्थिक वृद्धि दर 2021 में 8.5 प्रतिशत रही थी।

रेटिंग एजेंसी ने जी-20 अर्थव्यवस्थाओं की वृद्धि दर 2023 में घटकर 1.3 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। यह पूर्व में जताये गये 2.1 प्रतिशत के अनुमान से काफी कम है।

गुजमैन ने कहा कि राजकोषीय स्थिति में आगे और सुधार तथा उम्मीद के विपरीत राजकोषीय मजबूती से कर्ज में उल्लेखनीय कमी आएगी। इससे भारत के लिये रेटिंग के मामले स्थिति सकारात्मक होगी।

उल्लेखनीय है कि मूडीज ने पिछले साल अक्टूबर में भारत के साख परिदृश्य ‘नकारात्मक’ से ‘स्थिर’ श्रेणी में रखा और बीएए3 साख को बरकरार रखा। यह निम्न निवेश स्तर की रेटिंग है और कबाड़ वाले दर्जे से सिर्फ एक पायदान ऊपर है।

गुजमैन ने कहा, ‘‘...राजस्व के स्तर पर प्रदर्शन अपेक्षाकृत मजबूत है। हमारा मानना है कि राजकोषीय मजबूती की स्थिति बनी रहेगी। साथ ही कर्ज के मामले में भी स्थिति स्थिर होगी और इसमें फिर से उछाल की आशंका नहीं है।’’

देश का कर्ज-जीडीपी अनुपात 2022 के अंत में 84 प्रतिशत रहने का अनुमान है जो कई उभरती अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले अधिक है।

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