रामनगर (कर्नाटक), 28 जून जद (एस) नेता और पूर्व मुख्यमंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने बुधवार को आरोप लगाया कि कर्नाटक में सिद्धरमैया के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार अधिकारियों का स्थानांतरण करके “स्वच्छ प्रशासन का भ्रम” पैदा करने की कोशिश कर रही है, लेकिन वास्तव में वह पूर्ववर्ती भाजपा सरकार के खिलाफ अनियमितताओं के आरोपों की जांच नहीं करेगी।
पिछले भाजपा शासन की कथित अनियमितताओं की जांच के लिए मंत्रियों और मुख्यमंत्री द्वारा बार-बार दिए गए बयानों की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए हर दिन नए बयान जारी किए जा रहे हैं।
कुमारस्वामी ने कहा, “क्या आपने कभी किसी मुख्यमंत्री कार्यालय को एक पद के लिए पांच आदेश जारी करते देखा है? स्थानांतरण आदेश जारी करने के बाद, मुख्यमंत्री कार्यालय के पास आदेश क्रमांकित होंगे। किसने ऐसा माहौल बनाया है कि एक पद पर पांच-पांच लोगों की नियुक्ति के आदेश जारी हो रहे हैं, यह स्पष्ट है... बड़े पैमाने पर स्थानांतरण का कारोबार चल रहा है।”
यहां पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि एक तरफ कार्यक्रमों के दौरान मंच से और मीडिया के सामने खुलेआम बयान दिये जा रहे हैं कि वे रिश्वत नहीं लेंगे, लेकिन तबादलों का धंधा जोरों पर है।
उन्होंने कहा, इसके अलावा, सरकार हर विभाग में अधिकारियों के साथ पिछली भाजपा सरकार की तुलना में “खराब तरीके” से व्यवहार कर रही है। उन्होंने कहा, “सत्ता मिलने पर व्यक्ति को अपना दिमागी नियंत्रण नहीं खोना चाहिए और सम्मान के साथ काम करना सीखना चाहिए। सत्ता में रहने वाले लोग सार्वजनिक रूप से व्यवहार करना सीख लें तो बेहतर है।”
एक सवाल के जवाब में पूर्व मुख्यमंत्री ने दावा किया, “इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि इस सरकार में भी कमीशनखोरी का धंधा जारी रहेगा और दर तय करने के लिए सारे काम रोक दिए गए हैं।” उन्होंने पूछा, “यह हास्यास्पद है कि एक मंत्री कहते हैं कि पिछले चार वर्षों के दौरान किए गए विकास कार्यों की जांच की जाएगी। वे इसे कैसे और कहां से करेंगे।”
कुमारस्वामी ने कहा, “ऐसा लगता है कि इस सरकार ने पांच “गारंटियों” के साथ-साथ पिछली सरकार के लिये ‘थनिका ज्योति’ (जांच ज्योति) नामक एक और योजना देने का भी फैसला किया है।”
उन्होंने कहा, “किसी भी अनियमितता या घोटाले की जांच को तार्किक अंत तक नहीं ले जाया जाएगा; इससे कुछ नहीं होगा।”
पूर्व मुख्यमंत्री ने भारतीय जनता पार्टी व कांग्रेस पर एक ही सिक्के के दो पहलू होने का आरोप लगाया और कहा कि दोनों राष्ट्रीय पार्टियां “स्वतंत्र भारत और लोकतंत्र में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी” के समान हैं, क्योंकि वे भी “देश के संसाधनों को लूट रही हैं, जिस तरह से कंपनी ने अतीत में किया था”।
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