विदेश की खबरें | संरा की शीर्ष अदालत को क्रीमिया व आतंकवाद के वित्तपोषण पर यूक्रेन के मामले को खारिज करना चाहिए: रूस
श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

नीदरलैंड में रूस के राजदूत अलेक्जेंडर शुलगिन ने अंतरराष्ट्रीय न्याय अदालत (आईसीजे) में न्यायाधीशों को बताया, “हम आज आपके सामने यह प्रदर्शित करने के लिए उपस्थित हुए हैं कि यूक्रेन की अर्जी को खारिज कर दिया जाना चाहिए, क्योंकि यह बिना किसी कानूनी आधार के है और न ही इसके समर्थन में कोई तथ्यात्मक प्रमाण हैं।”

यूक्रेन के वकीलों ने मंगलवार को सुनवाई शुरू होने पर कहा कि रूस ने 2014 में शुरू हुए पूर्वी यूक्रेन में विद्रोहियों द्वारा “डराने और आतंक के अभियान” को नियंत्रित किया और क्रीमिया के बहुजातीय समुदाय को “भेदभावपूर्ण रूसी राष्ट्रवाद” से बदलने की मांग की।

यूक्रेन ने 2017 में मामला दायर किया था और विश्व अदालत से रूस को 17 जुलाई, 2014 को मॉस्को समर्थित विद्रोहियों द्वारा नियंत्रित क्षेत्र से दागी गई एक रूसी मिसाइल द्वारा मलेशिया एयरलाइंस की उड़ान एमएच17 को मार गिराने जैसे हमलों और अपराधों के लिए क्षतिपूर्ति का भुगतान के आदेश का अनुरोध किया है। विमान में सवार 298 यात्रियों व चालक दल के सभी सदस्यों की मौत हो गई थी।

यूक्रेनी सरकार का आरोप है कि रूस ने दो संधियों- आतंकवाद के वित्तपोषण के दमन के लिए अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन और नस्ली भेदभाव के सभी रूपों के उन्मूलन पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन- का उल्लंघन किया।

आतंकवाद के वित्तपोषण के आरोप को संबोधित करते हुए, रूस का प्रतिनिधित्व करने वाले एक ब्रिटिश वकील माइकल स्वेनस्टन ने कहा कि यूक्रेन की कानूनी टीम यह स्थापित करने में विफल रही कि पूर्वी यूक्रेन में रूस समर्थक विद्रोहियों द्वारा किए गए कार्यों को आतंकवाद माना जा सकता है।

स्वेनस्टन ने कहा, ‘‘उन आतंकवादियों के बीच अंतर करना अनिवार्य है जो जानबूझकर नागरिकों को निशाना बनाते हैं और दूसरी तरफ वे सैनिक हैं जो यह देखते हैं कि सैन्य लक्ष्य पर हमला करते समय अतिरिक्त क्षति के रूप में नागरिक भी मारे जाएंगे।’’

रूसी कानूनी टीम के एक अन्य सदस्य, किरिल उदोविचेंको ने अदालत को बताया कि यह "निर्विवाद" है कि यूक्रेन में संघर्ष के कारण "नागरिक जीवन का नुकसान हुआ। हालांकि, इनमें से कोई भी दुखद घटना संधि में परिभाषित आतंकवाद या आतंकवाद के लिए वित्तपोषण का मुमकिन कारण नहीं है।"

सुनवाई के अगले सप्ताह समाप्त होने की उम्मीद है, जिसके बाद न्यायाधीशों को मामले में निर्णय लेने में महीनों लगेंगे। अदालत के फैसले अंतिम और कानूनी रूप से बाध्यकारी हैं।

एपी

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