विदेश की खबरें | संबंधों में खटास के बीच अमेरिका रवाना हुए तुर्किये के शीर्ष राजनयिक
श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

इस यात्रा के दौरान कावुसोग्लु अपने अमेरिकी समकक्ष एंटनी ब्लिंकन से मुलाकात करेंगे। तुर्किये के किसी शीर्ष अधिकारी का अमेरिका की यात्रा करना सामान्य बात नहीं है। अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन के प्रशासन ने तुर्किये के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन के निरंकुश होते शासन और अधिकारों एवं स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगाने वाली उनकी नीतियों के कारण तुर्किये से दूरी बनाई हुई है।

तुर्किये अमेरिका के लिए रणनीतिक रूप से अहम है। तुर्किये सरकार ने पिछले साल रूस और यूक्रेन के बीच अहम समझौता कराने में मदद की थी, जिसकी वजह से युद्ध के बीच लाखों टन यूक्रेनी अनाज वैश्विक बाजार तक पहुंच पाया और खाद्य संकट टल गया।

तुर्किये और अमेरिका के बीच कई मामलों पर विवाद की स्थिति है। उनके बीच सबसे बड़ा विवाद तुर्किये के रूस निर्मित मिसाइल खरीदने और सीरिया में कुर्द मिलिशिया को मिलने वाला अमेरिकी समर्थन है।

तुर्किये पर 2017 में रूस एस-400 वायु रक्षा प्रणाली खरीदने के कारण प्रतिबंध लगे और उसे अगली पीढ़ी के एफ-35 लड़ाकू विमान के विकास कार्यक्रम से हटा दिया गया। अंकारा वर्तमान में अपने एफ-16 बेड़े को फिर से बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन इसे लेकर उसे अमेरिकी कांग्रेस के विरोध का सामना करना पड़ रहा है।

कावुसोग्लु ने इस सप्ताह विश्वास व्यक्त किया था कि अमेरिका से 40 एफ-16 विमान की खरीद के सौदे और इसके मौजूदा बेड़े को अद्यतन करने के लिए प्रौद्योगिकी हासिल करने में कांग्रेस में आई बाधाओं को दूर कर लिया जाएगा।

उन्होंने कहा, ‘‘हम (बाइडन) प्रशासन के साथ समझौते पर पहुंच गए हैं और यह महत्वपूर्ण है कि प्रशासन ने इस बात पर जोर दिया है कि समझौता न केवल तुर्किये के लिए, बल्कि नाटो के लिए भी महत्वपूर्ण है। प्रशासन डटा रहा तो कोई दिक्कत नहीं होगी।’’

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