बेंगलुरु, 26 अगस्त प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को कहा कि उन्होंने कर्नाटक के राज्यपाल, मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री से उनके स्वागत के लिए हवाई अड्डा नहीं आने का आग्रह किया था, क्योंकि लंबी उड़ान के बाद वह अपने आगमन के समय को लेकर आश्वस्त नहीं थे और इसलिए नहीं चाहते थे कि इन्हें सुबह इतनी जल्दी आने का कष्ट उठाना पड़े।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के वैज्ञानिकों से मुलाकात के लिए मोदी के बेंगलुरु आने से पहले कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने शुक्रवार को आरोप लगाया था कि प्रधानमंत्री ने मुख्यमंत्री सिद्धरमैया और उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार को एचएएल हवाई अड्डे पर उनके स्वागत के लिए आने से कथित रूप से रोका।
इस बीच, हवाई अड्डे पर प्रधानमंत्री के स्वागत के लिए प्रोटोकॉल की ‘‘अनदेखी’’ करने को लेकर भाजपा विधायक एवं पूर्व मंत्री आर. अशोक और उपमुख्यमंत्री शिवकुमार के बीच वाकयुद्ध छिड़ गया।
प्रधानमंत्री यूनान की राजधानी एथेंस से सुबह करीब छह बजे सीधे बेंगलुरु पहुंचे, ताकि वह चंद्रयान-3 मिशन में शामिल इसरो के वैज्ञानिकों से मिल सकें।
मोदी ने एचएएल (हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड) हवाई अड्डे के बाहर बड़ी संख्या में एकत्र लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि वह बहुत दूर (एथेंस) से आ रहे हैं और उन्हें यह नहीं पता था कि वह किस समय यहां पहुंचेंगे।
प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने राज्यपाल थावरचंद गहलोत, मुख्यमंत्री सिद्धरमैया और उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से उनके स्वागत के लिए हवाई अड्डा आने का कष्ट नहीं करने को कहा था, क्योंकि वह इसरो के वैज्ञानिकों को धन्यवाद देने के तुरंत बाद लौट जाएंगे।
मोदी ने कहा, ‘‘इसलिए, मैंने उनसे अनुरोध किया था कि जब मैं औपचारिक दौरा करूं, तो वे निश्चित ही प्रोटोकॉल का पालन करें। उन्होंने सहयोग किया और मैं उनका शुक्रगुजार एवं आभारी हूं।’’
रमेश ने आरोप लगाया था कि प्रधानमंत्री इस बात को लेकर सिद्धरमैया और शिवकुमार से चिढ़ गए कि उनसे पहले उन दोनों ने इसरो के वैज्ञानिकों को सम्मानित किया। रमेश ने मोदी पर मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री को रोककर ‘‘ओछी राजनीति’’ करने का आरोप लगाया था।
मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने यहां इसरो के ‘टेलीमेट्री, ट्रैकिंग और कमांड नेटवर्क’ (आईएसटीआरएसी) का बृहस्पतिवार को दौरा किया था और चंद्रयान-3 मिशन की सफलता के लिए इसरो प्रमुख एस. सोमनाथ और उनकी टीम को बधाई दी थी।
सिद्धरमैया ने चंद्रमा पर चंद्रयान-3 की सफल ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ को ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए कहा था कि राज्य सरकार इसके लिए इसरो की टीम को आधिकारिक तौर पर सम्मानित करने के वास्ते एक विशेष कार्यक्रम आयोजित करेगी।
सिद्धरमैया ने कहा था, ‘‘सरकार विधान सौध के सभागार में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित करके इसरो के अध्यक्ष (एस) सोमनाथ और उनकी टीम को आधिकारिक तौर पर सम्मानित करेगी। कर्नाटक के लगभग 500 वैज्ञानिक इस मिशन का हिस्सा थे।’’
प्रधानमंत्री की अगवानी के लिए मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के हवाईअड्डे पर नहीं जाने से जुड़े सवाल का जवाब देते हुए भाजपा नेता अशोक ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेताओं को प्रोटोकॉल की कोई समझ नहीं है।
अशोक ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘कांग्रेस नेता वैज्ञानिकों की अनदेखी करना चाहते हैं। उन्होंने ही चंद्रयान-2 को रोका था। उन्होंने इसरो के पूर्व वैज्ञानिक नंबी नारायणन को जेल में डाल दिया था। उच्चतम न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद उन्हें रिहा किया गया था।’’
कांग्रेस सरकार पर हमला करते हुए पूर्व मंत्री ने आरोप लगाया, ‘‘उन्हें प्रोटोकॉल का कोई ज्ञान नहीं है। वे वोट के लिए राजनीति करते हैं जबकि हमारे प्रधानमंत्री की राजनीति देश के विकास के लिए है।’’
शिवकुमार ने इस पर पलटवार करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) से आधिकारिक सूचना मिली थी कि उन्हें, राज्यपाल थावरचंद गहलोत और मुख्यमंत्री को प्रधानमंत्री का स्वागत करने नहीं आना चाहिए।
उन्होंने कहा कि अशोक का बयान इस बात का सबूत है कि केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री कार्यालय ने उन्हें किस तरह से दूर रखा है।
शिवकुमार ने कहा, ‘‘समय की हमारी समझ, राजनीतिक समझ, प्रोटोकॉल की समझ और लोगों का सम्मान करने की भावना भाजपा से बेहतर है। हम प्रोटोकॉल के अनुसार प्रधानमंत्री की अगवानी के लिए सुबह तैयार थे। हमारे मुख्यमंत्री, हमारी सरकार उनकी अगवानी के लिए तैयार थी क्योंकि यह (कांग्रेस सरकार के सत्ता में आने और चंद्रयान मिशन की सफलता के बाद) उनकी (प्रधानमंत्री की) बेंगलुरु की पहली यात्रा थी।’’
शिवकुमार ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘हमारी (कर्नाटक) मुख्य सचिव वंदिता शर्मा को अनौपचारिक रूप से प्रधानमंत्री कार्यालय से एक फोन आया (कि राज्यपाल, मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री को नहीं आना चाहिए) लेकिन हम इसके लिए सहमत नहीं हुए और मुख्य सचिव से कहा कि वह पीएमओ से लिखित में निर्देश प्राप्त करें।’’
शिवकुमार ने दावा किया कि तब पीएमओ ने आधिकारिक तौर पर जवाब दिया कि राज्यपाल, मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री को प्रधानमंत्री की अगवानी करने नहीं आना चाहिए।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि वह पीएमओ से प्राप्त संचार को सार्वजनिक तौर पर जारी कर सकते हैं।
इसरो ने बुधवार को अंतरिक्ष क्षेत्र में एक नया इतिहास रचते हुए चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर लैंडर ‘विक्रम’ और रोवर ‘प्रज्ञान’ से लैस लैंडर मॉड्यूल की ‘सॉफ्ट लैंडिग’ कराने में कामयाबी हासिल की थी। भारतीय समयानुसार शाम करीब छह बजकर चार मिनट पर यान ने चांद की सतह को छुआ था।
इसके साथ ही भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ करने वाला दुनिया का पहला देश तथा चांद की सतह पर ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ करने वाला दुनिया का चौथा देश बन गया।
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