जयपुर, 23 सितंबर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने देश की अर्थव्यवस्था में निजी क्षेत्र के बढ़ते महत्व को रेखांकित करते हुए सोमवार को कहा कि आज देश की अर्थव्यवस्था की गाड़ी की ‘ड्राइविंग सीट’ पर निजी क्षेत्र बैठा हुआ है।
राजनाथ ने यहां एक सैनिक स्कूल के उद्घाटन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि नए सैनिक स्कूल भी ‘पीपीपी’ मॉडल के तहत स्थापित किए जा रहे हैं। पीपीपी को उन्होंने ‘सार्वजनिक निजी भागीदारी’ के बजाय ‘निजी सार्वजनिक भागीदारी’ के रूप में परिभाषित किया, ताकि निजी क्षेत्र के महत्व पर जोर दिया जा सके।
इसके साथ ही उन्होंने विश्वास जताया कि सैनिक स्कूल समाज को नयी दिशा देने के प्रयास को नयी गति देने का काम करेंगे। सिंह ने कहा कि ये स्कूल अपने विद्यार्थियों में अनुशासन, देशभक्ति व साहस जैसे मूल्य भरते हैं।
रक्षा मंत्री ने कहा कि देश में अब तक स्थापित सभी सैनिक स्कूल केंद्र और राज्य सरकारों के संयुक्त प्रयासों से चलाए जा रहे थे, लेकिन प्रधानमंत्री ने जिन 100 नए सैनिक स्कूलों की स्थापना का लक्ष्य रखा है, वे 'पीपीपी' मॉडल निजी-सार्वजनिक भागीदारी के आधार पर स्थापित और संचालित किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि आम तौर पर पीपीपी मॉडल को 'सार्वजनिक निजी भागीदारी' के रूप में देखा जाता है।
रक्षा मंत्री ने कहा,''लेकिन प्रधानमंत्री ने जिन 100 नए सैनिक स्कूल की स्थापना का लक्ष्य रखा है वह केंद्र और राज्य सरकार की पार्टनरशिप से नहीं बल्कि नहीं पीपीपी मॉडल यानी निजी सार्वजनिक भागीदारी के आधार पर स्थापित और संचालित किये जा रहे हैं।''
उन्होंने कहा,'' जब भी सार्वजनिक निजी भागीदारी की बात आती है तो पब्लिक शब्द यानी सरकार की भूमिका पहले आती है। कोई भी परियोजना होती है, तो हम सरकार की भूमिका सबसे पहले ढूंढने लगते है। परिस्थितियां अब पूरी तरह से बदल रही हैं। इसलिए अब पीपीपी की मानक परि से हटकर इसे निजी सार्वजनिक भागीदारी समझता हूं। इसलिए हमने पहले सार्वजनिक शब्द का इस्तेमाल नहीं किया। हमने पहले निजी शब्द का उपयोग किया किया।''
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