लखनऊ, 27 अगस्त उत्तर प्रदेश सरकार ने स्वच्छ भारत अभियान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता और कचरा मुक्त शहर बनाने के इरादे के तहत प्रत्येक नगरीय निकाय में स्वमूल्यांकन की व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।
अधिकारी ने बताया कि राज्य के शहरों को कचरा मुक्त बनाने के लिए प्रत्येक नगरीय निकाय में 30 अगस्त तक स्वमूल्यांकन किया जाएगा और चार सितंबर को इसकी समीक्षा होगी। इस संदर्भ में नगर विकास विभाग के प्रमुख सचिव अमृत अभिजात ने सभी जिलाधिकारियों को पत्र भी लिखा है।
अप्रैल में राज्य के शहरी निकायों में एक मॉक मूल्यांकन आयोजित किया गया था, जिसमें स्वच्छ सर्वेक्षण 2023 के तहत कचरा मुक्त शहर के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को जारी रखने की आवश्यकता को रेखांकित किया गया था।
अभिजात ने बताया, ''स्वमूल्यांकन एक समर्पित गूगल फॉर्म के माध्यम से किया जाएगा, जो कचरा मुक्त शहर के मूल्यांकन के प्रत्येक मानक को परिभाषित करेगा। यह फॉर्म नगरीय निकाय द्वारा भरा जाएगा। स्वमूल्यांकन रिपोर्ट को जमा करने की अंतिम तिथि 30 अगस्त की शाम पांच बजे तक है।''
अभिजात ने सभी अधिशासी अधिकारियों को निर्धारित समय सीमा में इसे सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने बताया कि चार सितंबर को सुबह 11 बजे स्वमूल्यांकन की समीक्षा की जायेगी।
अभिजात ने कहा कि स्वमूल्यांकन रिपोर्ट को सही ढंग से पूरा करने और निर्धारित समयसीमा में जमा करने की कार्यवाही अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की जाएगी।
उन्होंने बताया कि नगर पालिका परिषद/नगर पंचायत के इस उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए राज्य सरकार द्वारा स्व-मूल्यांकन प्रणाली शुरू करके एक सक्रिय कदम उठाया गया है।
अभिजात ने कहा, ''इसका उद्देश्य शहरी निकायों को उनकी प्रगति के मूल्यांकन में सक्रिय रूप से भाग लेने और उन क्षेत्रों की पहचान करने के लिए सशक्त बनाना है, जिन पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है। अप्रैल में शुरू की गई मूल्यांकन की यह प्रणाली इस संबंध में सरकार की नीतियों के प्रभावी कार्यान्वयन में मदद करेगी।''
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