जरुरी जानकारी | पराली के संकट से छुटकारा पाने के लिए जम्मू में बासमती से समृद्ध खेतों ने रिपर तकनीक अपनाई
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. जम्मू-कश्मीर के आर एस पुरा सीमा क्षेत्र में भारत के बासमती समृद्ध कृषि क्षेत्रों ने एक नई तकनीक अपनाई है, जिसमें उन्नत रिपर्स का उपयोग पराली जलाने के खतरे से छुटकारा पाने के लिए किया जाता है।
चकरोही सीमा (आर एस पुरा), 16 मई जम्मू-कश्मीर के आर एस पुरा सीमा क्षेत्र में भारत के बासमती समृद्ध कृषि क्षेत्रों ने एक नई तकनीक अपनाई है, जिसमें उन्नत रिपर्स का उपयोग पराली जलाने के खतरे से छुटकारा पाने के लिए किया जाता है।
कृषि विभाग (डीओए) ने पराली को काटने और उसे चारे में बदलने के लिए संशोधित रिपर्स की पेशकश की है।
रिपर एक कृषि उपकरण है जिसका उपयोग मिट्टी को ढीला करने या वायु समृद्ध करने के लिए किया जाता है।
बीज गुणन फार्म चकरोही के प्रबंधक राकेश खंजूरिया ने कहा, ‘‘रिपर्स के इस्तेमाल से न केवल खेत में आग और प्रदूषण खत्म होगा, बल्कि मवेशियों के लिए चारा भी पैदा होगा।’’
खंजूरिया ने कहा कि नई तकनीक के इस्तेमाल से न केवल प्रदूषण, खेतों में आग लगने और मिट्टी में मौजूद खनिजों और कीड़ों को नष्ट होने से रोका जा सकता है, बल्कि क्षेत्र के मवेशियों के लिए चारा और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार पैदा होता है।
अधिकारियों ने कहा कि प्रदूषण के बजाय चारा बनाने के लिए रिपर्स की शुरुआत न केवल पूरे जम्मू-कश्मीर में बल्कि पंजाब और हरियाणा में भी की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘दिल्ली, हरियाणा और पंजाब, जहां इस तरह की घटनाएं तेजी से हो रही हैं, उन्हें इसे (पराली काटने की रिपर तकनीक) अपनाना चाहिए। इसका उपयोग पूरे जम्मू-कश्मीर में किया जाना चाहिए। इससे प्रदूषण नियंत्रित होगा और मशरूम और डेयरी उद्यमों को बढ़ावा मिलेगा।’’
जम्मू-कश्मीर के चकरोही में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर दो तरफ की उपजाऊ कृषि भूमि में 850 एकड़ में बोई गई गेहूं की 13 किस्मों को काटने के लिए किसान और कटाई करने वाले काम कर रहे हैं, जो कि पाकिस्तानी गोलाबारी के कारण एक साल पहले तक सोचना मुश्किल था।
कटाई का 70 प्रतिशत काम हो चुका है।
जम्मू से लगभग 50 किलोमीटर दूर चकरोही-जोरा कृषि क्षेत्र में सीमा बाड़ के दोनों किनारों पर लगभग 1,000 एकड़ में फैले बीज गुणन फार्म के बारे में कहा जाता है कि यह गेहूं, बासमती, तेल, चारा और सब्जियों के सबसे अच्छे बीज उगाता है।
उन्नत रिपर की शुरुआत स्थानीय लोगों के लिए आय सृजन और डेयरी उद्योग और पशु मालिकों के लिए कम लागत वाले चारे का स्रोत बन गई है।
खंजूरिया ने कहा, ‘‘आज कृषि विभाग द्वारा शुरू की गई तकनीक - रिपर ने लोगों को सस्ती दर पर उनके घर पर चारा उपलब्ध कराने में मदद की है। वे इसका उपयोग डेयरी उद्यम शुरू करने के लिए कर रहे हैं और लाभान्वित भी हो रहे हैं और अच्छी आय प्राप्त कर रहे हैं।’’
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