नयी दिल्ली, नौ अगस्त सरकार ने बुधवार को कहा कि चावल और गेहूं की घरेलू उपलब्धता बढ़ाने और इन दो प्रमुख खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए वह केंद्रीय पूल से खुले बाजार में 50 लाख टन गेहूं और 25 लाख टन चावल की और बिक्री करेगी।
चावल खरीदारों की संख्या कम होने के बीच सरकार ने खुले बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के तहत चावल का आरक्षित मूल्य दो रुपये प्रति किलोग्राम घटाकर 29 रुपये प्रति किलोग्राम कर दिया है।
गेहूं आयात शुल्क में कटौती की संभावना पर सरकार ने कहा कि वह भविष्य में आवश्यकता के आधार पर कदम उठाएगी क्योंकि चीजें गतिशील और विकसित हो रही हैं।
सरकारी स्वामित्व वाली भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) 28 जून से ई-नीलामी के माध्यम से ओएमएसएस के तहत थोक खरीदारों जैसे आटा मिलों और छोटे व्यापारियों को केंद्रीय पूल से गेहूं और चावल बेच रही है।
खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘दो वस्तुओं की कीमतें पिछले कुछ महीनों से खबरों में हैं, क्योंकि हम इन अनाजों की कीमतों में बढ़त की प्रवृत्ति देख रहे हैं।’’
ओएमएसएस के तहत गेहूं का उठाव अब तक अच्छा रहा है। हालांकि, पिछली दो-तीन नीलामियों में गेहूं की भारित औसत कीमत बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि चावल में ज्यादा उठाव नहीं हुआ है।
चोपड़ा ने कहा कि सरकार को लगा कि चावल के आरक्षित मूल्य में बदलाव से बेहतर परिणाम आ सकते हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘सरकार ने ओएमएसएस के जरिए 50 लाख टन गेहूं और 25 लाख टन चावल खुले बाजार में लाने का फैसला किया है।’’
यह 28 जून को ओएमएसएस के तहत घोषित 15 लाख टन गेहूं और 5 लाख टन चावल की बिक्री के अतिरिक्त है।
इसके अलावा, सचिव ने कहा कि सरकार ने चावल का आरक्षित मूल्य 2 रुपये प्रति किलोग्राम घटाकर 31 रुपये प्रति किलोग्राम से 29 रुपये प्रति किलोग्राम कर दिया है।
हालांकि, गेहूं का आरक्षित मूल्य अपरिवर्तित रखा गया है क्योंकि ओएमएसएस के तहत व्यापारियों से अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है।
उन्होंने कहा कि ओएमएसएस के तहत अब तक लगभग 7-8 लाख टन गेहूं की नीलामी की गई है, जबकि चावल की बिक्री बहुत कम है।
चोपड़ा ने कहा कि सरकार उम्मीद कर रही है कि इन उपायों से न केवल बाजार में उपलब्धता में सुधार होगा बल्कि कीमतों को कम करने और खाद्य मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने में भी मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा, ''...अगले कुछ हफ्तों में प्रतिक्रिया के आधार पर, हम उनमें बदलाव करते रहेंगे। अंतिम उद्देश्य खाद्य मुद्रास्फीति को नियंत्रण में रखना है।'' उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर अधिक आक्रामक नीलामी करने के लिए सरकार के पास पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है।
गेहूं आयात शुल्क में कटौती की संभावना पर सचिव ने कहा, ‘‘अभी, हमने ये कदम उठाए हैं। ये गतिशील और विकासशील हैं। भविष्य में आवश्यकताओं के आधार पर, हम कदम उठाएंगे।’’
उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र यह सुनिश्चित करने के लिए राज्यों के साथ काम कर रहा है कि गेहूं में स्टॉक सीमा का उल्लंघन न हो।
ओएमएसएस के तहत खाद्यान्न की बिक्री के बारे में जानकारी साझा करते हुए, एफसीआई के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक अशोक के मीणा ने कहा कि गेहूं और चावल की कीमतों में बढ़त की प्रवृत्ति को देखते हुए ओएमएसएस अभियान इस साल के आरंभ में 28 जून को शुरू किया गया था।
आज की नीलामी को लेकर अब तक सात ई-नीलामी आयोजित की गई हैं। शुरुआत में बिक्री के लिए पेश किया जाने वाला गेहूं चार लाख टन हुआ करता था और अब, आज की ई-नीलामी में इसे घटाकर एक लाख टन कर दिया गया है। उन्होंने कहा, अब तक लगभग 8 लाख टन गेहूं बेचा जा चुका है।
एफसीआई प्रमुख ने यह भी कहा कि आरंभ में 28 जून को गेहूं का भारित औसत बिक्री मूल्य 2,136.36 रुपये प्रति क्विंटल था, जो अब आज की ई-नीलामी में 2,254.71 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है।
उन्होंने कहा, ‘‘इससे पता चलता है कि बाजार में गेहूं की मांग में वृद्धि हुई है।’’
मीणा ने कहा कि पांच जुलाई से चावल के लिए लगभग छह ई-नीलामी आयोजित की गई हैं, लेकिन उठाव अपेक्षित स्तर तक नहीं हो पाया है। इसमें आरक्षित मूल्य 31.73 रुपये प्रति किलोग्राम था।
उन्होंने कहा, ‘‘आज की ई-नीलामी में ओएमएसएस के तहत लगभग 1,500 टन चावल बेचा गया है।’’
एफसीआई के पास पर्याप्त खाद्यान्न भंडार है। उन्होंने कहा कि इसमें बफर मानदंडों से अधिक 87 लाख टन गेहूं और 217 लाख टन चावल उपलब्ध है।
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