देश की खबरें | टीएमसी ने जलियांवाला बाग में रवींद्रनाथ टैगोर की प्रतिमा स्थापित करने की मांग की
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नयी दिल्ली, 24 जुलाई तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसद रीताब्रता बनर्जी ने बृहस्पतिवार को मांग की कि पंजाब के अमृतसर स्थित जलियांवाला बाग में नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर की प्रतिमा स्थापित की जाए।
टैगोर एक बांग्ला कवि, लेखक, संगीतकार और चित्रकार थे, उन्हें 1915 में किंग जॉर्ज पंचम द्वारा ‘नाइटहुड’ की उपाधि से सम्मानित किया गया था। वर्ष 1919 के जलियांवाला बाग हत्याकांड के बाद टैगोर ने इस उपाधि को त्याग दिया था।
यह मांग तब आई जब संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने राज्यसभा में बनर्जी के एक प्रश्न के लिखित उत्तर में इस बात से इनकार किया कि सरकार की स्मारक पर टैगोर की प्रतिमा स्थापित करने की कोई योजना है।
शेखावत ने अपने जवाब में कहा, "रवींद्रनाथ टैगोर की प्रतिमा जलियांवाला बाग में स्थापित नहीं की गई है, क्योंकि यह स्मारक मुख्य रूप से नरसंहार के पीड़ितों की याद में बनाया गया है और इसमें शहीद गैलरी और एक कुआं भी शामिल है, जहां से लोगों ने भागने की कोशिश की थी।"
बनर्जी ने कहा कि नरसंहार के खिलाफ पहला और सबसे तीखा विरोध टैगोर की ओर से किया गया था।
बनर्जी ने मीडिया से कहा, "मैंने संस्कृति मंत्रालय से पूछा कि क्या जलियांवाला बाग में रवींद्रनाथ टैगोर की कोई प्रतिमा है या उनकी प्रतिमा स्थापित करने की कोई योजना है। जवाब था, नहीं।"
उन्होंने कहा, "आज भाजपा शासित राज्यों में बांग्ला भाषी लोगों को निशाना बनाया जा रहा है। टैगोर एक कुशल संगीतकार, कलाकार और दार्शनिक होने के अलावा एक उत्साही राजनीतिक कार्यकर्ता भी थे।"
बनर्जी ने कहा, "उन्होंने जलियांवाला बाग नरसंहार के विरोध में अपनी ‘नाइटहुड’ की उपाधि त्याग दी थी। टैगोर की प्रतिमा की स्थापना के साथ ही इस पत्र को उचित तरीके से और प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाना चाहिए।"
टीएमसी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, "गुरुदेव जलियांवाला बाग हत्याकांड के सबसे प्रमुख और सैद्धांतिक विरोधियों में से एक थे। औपनिवेशिक क्रूरता से बुरी तरह स्तब्ध होकर उन्होंने निर्दोष नागरिकों पर की गई भीषण हिंसा के विरोध में ब्रिटिश क्राउन द्वारा प्रदत्त अपनी ‘नाइटहुड’ की उपाधि त्याग दी।"
तेरह अप्रैल 1919 को बैसाखी के दिन, लगभग 20,000 लोगों की भीड़ परिसर में जलियांवाला बाग में इकट्ठा हुई थी। यह भीड़ "रॉलेट एक्ट" के विरोध में थी, जिसने पुलिस को बिना किसी कारण के किसी भी भारतीय को गिरफ्तार करने का अधिकार दे दिया था।
ब्रिगेडियर जनरल आर.ई.एच. डायर ने अपने सैनिकों को निहत्थे नागरिकों पर गोलियां चलाने का आदेश दिया और कई लोग गोलीबारी से बचने के लिए खुले परिसर में स्थित कुएं में कूद गए थे।
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(The above story first appeared on LatestLY on Jul 24, 2025 07:30 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

