उत्तर भारत में तिब्बती संसद कशाग ने कहा कि लड़के को 11वें पंचेन लामा के तौर पर नामित किया गया था। छह वर्ष की उम्र में उन्हें उनके परिवार के साथ 1995 में उठा लिया गया और वह इस पद पर वैध रूप से वहीं विराजमान हैं।
तिब्बत को अपना क्षेत्र मानने वाले चीन ने एक अन्य लड़के ग्याल्तसेन नोरबु को इस पद के लिए नामित किया और समझा जाता है कि चीन में वह सरकार के नियंत्रण में रहते हैं और कभी-कभी ही सार्वजनिक रूप से दिखते हैं।
कशाग ने बयान जारी कर कहा, ‘‘चीन द्वारा पंचेन लामा का अपहरण करना और उनकी धार्मिक पहचान से जबरन इंकार करना और मठ में उन्हें पूजा-पाठ से रोकना न केवल धार्मिक आजादी का उल्लंघन है बल्कि मानवाधिकारों का भी गंभीर उल्लंघन है।’’
बयान में कहा गया है, ‘‘अगर चीन का यह दावा सत्य है कि तिब्बत के लोगों को तिब्बत के अंदर धार्मिक आजादी है तो चीन को 11वें पंचेन लामा के बारे में बताना चाहिए कि वह कहां हैं और कैसे हैं।’’
चीनी शासन का विरोध कर 1959 में स्वनिर्वासन में चले जाने वाले दलाई लामा ने गेधून चोइकी नियिमा को तिब्बत के लामाओं के सहयोग से मूल पंचेन नामित किया था।
दसवें पंचेन लामा को चीन ने जेल में बंद कर दिया था और तिब्बतियों के लिए धार्मिक और सामाजिक आजादी का आह्वान करने के बाद 1989 में संदिग्ध परिस्थितियों में उनकी मौत हो गई थी।
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