विदेश की खबरें | संयुक्त राष्ट्र सौदे के तहत यूक्रेनी बंदरगाह से अनाज लेकर तीन और जहाज रवाना
श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

लेकिन जिन देशों को इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है, उन्हें खाद्यान्न प्राप्त करने में बड़ी बाधाएं हैं। आयरलैंड, ब्रिटेन और तुर्किये के लिए रवाना जहाज ने युद्ध की शुरुआत के बाद से पहली बार काला सागर को पार किया।

तुर्किये और संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता में रूस और यूक्रेन के बीच सौदे के तहत पहला जहाज इस सप्ताह की शुरुआत में अनाज लेकर लेबनान के लिए रवाना हुआ था।

काला सागर क्षेत्र को दुनिया का ‘ब्रेडबास्केट’ कहा जाता है, क्योंकि इस क्षेत्र में यूक्रेन और रूस गेहूं, मक्का, जौ और सूरजमुखी तेल के प्रमुख वैश्विक आपूर्तिकर्ता हैं, जो अफ्रीका, मध्य पूर्व और एशिया के कुछ हिस्सों में लाखों गरीब लोगों का भरण-पोषण करते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि अनाज के निर्यात ने वैश्विक खाद्य संकट को कम करने की उम्मीद जगाई है, लेकिन यूक्रेन जो अनाज निर्यात करने की कोशिश कर रहा है, उसका इस्तेमाल जानवरों के चारे के लिए किया जाता है, न कि लोगों के खाने के लिए।

अनाज लेकर यूक्रेनी बंदरगाहों से रवाना जहाज उन मालवाहक जहाजों में शामिल थे, जो अनाज से लदे हुए थे लेकिन फरवरी के अंत में यूक्रेन पर रूसी आक्रमण के कारण बंदरगाहों पर फंस गए थे।

यूक्रेन से अनाज का निर्यात शुरू होने के बावजूद कई कारणों से मक्का, गेहूं और सोयाबीन की वैश्विक कीमत पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ने की उम्मीद नहीं है। तीन जहाज शुक्रवार को 58,000 टन से अधिक मक्का लेकर यूक्रेन से रवाना हुए, लेकिन यह उस दो करोड़ टन अनाज का एक अंश भर है जो यूक्रेन के मुताबिक उसके बंदरगाहों और भंडार गृहों में फंसा हुआ है।

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