देश की खबरें | भारत को तोड़ने की नींव रखने वालों को पाठ्यक्रम में नहीं होना चाहिए : डीयू के कुलपति

नयी दिल्ली, 27 मई दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) की अकादमिक परिषद द्वारा राजनीतिक विज्ञान पाठ्यक्रम से पाकिस्तान के राष्ट्रीय कवि मोहम्मद इकबाल से संबंधित एक अध्याय को हटाने का प्रस्ताव पारित किए जाने के बाद डीयू के कुलपति योगेश सिंह ने कहा कि भारत को तोड़ने की नींव रखने वालों को पाठ्यक्रम में नहीं होना चाहिए।

प्रसिद्ध गीत 'सारे जहां से अच्छा' के रचयिता मोहम्मद इकबाल का जन्म 1877 में अविभाजित भारत के सियालकोट में हुआ था। उन्हें अक्सर पाकिस्तान के विचार को जन्म देने का श्रेय दिया जाता है।

विश्वविद्यालय की अकादमिक परिषद ने शुक्रवार को एक बैठक में 'आधुनिक भारतीय राजनीतिक विचार' शीर्षक वाले अध्याय को हटाने के लिए एक प्रस्ताव पारित किया था।

अधिकारियों ने बताया कि यह पाठ्यक्रम बीए के छठे सेमेस्टर के पाठ्यक्रम का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि इसे हटाने के संबंध में अंतिम निर्णय लेने के लिए डीयू की कार्यकारी परिषद के समक्ष पेश किया जाएगा।

कुलपति सिंह ने कहा कि इकबाल ने ‘मुस्लिम लीग’ और ‘पाकिस्तान आंदोलन’ का समर्थन करने वाले गीत लिखे थे।

डीयू द्वारा जारी बयान के अनुसार, कुलपति ने कहा, “इकबाल भारत के विभाजन और पाकिस्तान की स्थापना के विचार को उठाने वाले पहले व्यक्ति थे। ऐसे लोगों के बारे में पढ़ाने के बजाय, हमें अपने राष्ट्रीय नायकों का अध्ययन कराने पर जोर देना चाहिए। जिन लोगों‍ ने भारत के विभाजन की नींव रखी, उन्हें पाठ्यक्रम का हिस्सा नहीं होना चाहिए।”

विश्वविद्यालय ने कहा कि शुक्रवार को करीब 15 घंटे तक चली बैठक में कुलपति का प्रस्ताव अकादमिक परिषद द्वारा सर्वसम्मति से पारित किया गया था।

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