अमरावती, तीन मार्च आंध्र प्रदेश के जिलों का प्रस्तावित पुनर्गठन कुछ वजहों से हो सकता है कि 31 मार्च की समयसीमा तक न हो पाए।
अधिकारियों ने कहा कि इस उद्देश्य से गठित मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली उच्च स्तरीय आधिकारिक समिति विभिन्न विवादित मुद्दों, खासतौर पर नए जिलों की सीमाएं तय करने से संबंधित, को सुलझा नहीं पाई है।
इसके अलावा नए बनने वाले जिलों के लिये नए कार्यालय परिसर समेत आवश्यक आधारभूत संरचना तैयार करना भी राज्य की आर्थिक स्थिति के मद्देनजर चुनौतीपूर्ण कार्य के तौर पर देखा जा रहा है।
कर्मचारियों के संदर्भ में बताया जा रहा है कि समिति ने किसी नए पद के सृजन की आवश्यता नहीं जताते हुए कहा कि मौजूदा अधिकारियों को बांटकर और उन्हें नए सिरे से कार्य आवंटित कर काम चलाया जा सकता है।
इस पूरी कवायद में शामिल एक शीर्ष अधिकारी ने कहा, “एक अहम समस्या जिलों की सीमाओं के पुनर्निर्धारण को लेकर है क्योंकि कई भौगोलिक असमानताएं हैं। संसाधनों का वितरण भी पेचीदा साबित हो रहा है।”
राज्य में फिलहाल 13 जिले हैं।
वाईएसआर कांग्रेस ने 2019 के आम चुनावों से पहले प्रत्येक लोकसभा क्षेत्र को आधार मानकर नए जिले बनाने का वादा किया था जिससे प्रदेश में जिलों की संख्या 25 होनी है।
सरकार ने हालांकि बाद में चार जिलों में फैले अराकू संसदीय क्षेत्र को दो नए जनजातीय जिलों में करने का फैसला किया जिससे कुल संख्या बढ़कर 26 हो रही है।
वाई एस जगन मोहन रेड्डी सरकार ने कहा कि नए जिलों का गठन प्रशासनिक सुगमता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया जा रहा कदम है क्योंकि मौजूदा जिले आकार में बड़े हैं और आम लोगों को इससे मुश्किल पेश आती है।
मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली उच्च स्तरीय समिति अब तक कई दौर की चर्चा कर चुकी है लेकिन जिलों के पुनर्गठन की कवायद पर किसी निर्णायक फैसले तक नहीं पहुंची।
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