नयी दिल्ली, सात मार्च विदेशों में कमजोरी के रुख के बीच दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में मंगलवार को तेल- तिलहन कीमतों में गिरावट बनी रही तथा सरसों, सोयाबीन तेल-तिलहन, कच्चा पामतेल (सीपीओ) एवं पामोलीन और बिनौला तेल कीमतों में गिरावट दर्ज हुई। दूसरी ओर मूंगफली तेल-तिलहन के भाव पूर्वस्तर पर बने रहे।
बाजार के जानकार सूत्रों ने कहा कि मलेशिया और शिकॉगो एक्सचेंज में फिलहाल गिरावट का रुख है।
सूत्रों ने कहा कि देश में बगैर संसाधित किये गये नरम तेल- चावल भूसी तेल (राइसब्रान) का दाम 80 रुपये लीटर पड़ता है। जबकि आयातित सूरजमुखी तेल का दाम बंदरगाह पर 89 रुपये लीटर रह गया है। जबकि आयातित सोयाबीन तेल का दाम 91 रुपये लीटर रह गया है। इस परिस्थिति के बारे में कोई क्यों नहीं बोलता? लोगों की चिंता सिर्फ पाम एवं पामोलीन तेल के बीच शुल्क अंतर बढ़ाने तक क्यों सीमित रह जाती है?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बजट पर दसवें वेबिनार को संबोधित करते हुए उच्च शिक्षा और खाद्य तेल का उदाहरण देते हुए कहा, ‘‘हमें देखना होगा कि वे कौन से क्षेत्र हैं जहां हम भारत में ही क्षमता निर्माण कर देश का पैसा बचा सकते हैं।’’
सूत्रों ने कहा कि देश के प्रमुख तेल संगठनों को इस उद्देश्य को ध्यान में रखकर काम करना होगा और किसानों को क्या प्रोत्साहन या संरक्षण की जरुरत है, इस बात को ध्यान में रखकर, सरकार को समय समय पर सही जानकारियां उपलब्ध करानी पड़ेंगी।
सूत्रों ने कहा कि हमें सूरजमुखी और सोयाबीन जैसे ‘सॉफ्ट आयल’ पर विशेष ध्यान देना होगा जो देशी तेल- तिलहनों पर असर डालते हैं। इनके भाव टूटे पड़े हैं। बाजार आयातित तेल से पटा है तथा अपनी जरूरत के लगभग 60 प्रतिशत आयात पर निर्भर भारत में यहां के किसानों की तिलहन उपज और उससे बने खाद्य तेल बाजार में खपने की स्थिति में न हो, इससे बड़ी बिडंबना और क्या हो सकती है।
सूत्रों ने कहा कि देश में सूरजमुखी बीज का भाव एमएसपी 6,400 रुपये क्विंटल (मंडी खर्च और वारदाना अलग से) के हिसाब से इसका तेल हमें पेराई के बाद 135 रुपये लीटर पड़ता है। जबकि आयात किया हुआ सूरजमुखी तेल का भाव है 89 रुपये लीटर। इस 6,400 रुपये क्विंटल बैठने वाले देशी सूरजमुखी तेल का 4,200 रुपये क्विंटल पर भी कोई लिवाल नहीं है। यह स्थिति देशी तेल उद्योग और किसानों को नुकसान पहुंचा सकती है, लेकिन इसके बारे में तमाम विशेषज्ञों ने चुप्पी साध रखी है।
सूत्रों ने कहा कि लगभग दो माह पूर्व सूरजमुखी तेल का दाम कच्चे पामतेल (सीपीओ) से लगभग 40 रुपये प्रति लीटर महंगा था। वह अब घटकर मात्र 10-12 रुपये लीटर महंगा रह गया है। यह स्थिति सभी नरम तेलों पर आयात शुल्क लगाये और बढ़ाये जाने की मांग करती है और इसपर तत्काल कदम उठाने की जरुरत है।
सूत्रों ने कहा कि होली के बाद मंडियों में सरसों की आवक बढ़कर 14-15 लाख बोरी हो सकती है जो आज लगभग 10 लाख बोरी की रही। अगर मौजूदा सस्ते आयातित तेलों पर लगाम नहीं लगी तो सरसों की दो लाख बोरी भी नहीं खपेगी। सूत्रों ने कहा कि सरसों के सहकारी संस्था नाफेड से खरीद करवाने के फैसले से अपेक्षित परिणाम निकलने की उम्मीद कम है। नाफेड के गोदाम में माल जाने के बाद अगली सरसों की बिजाई के समय भी सट्टेबाजों की तरफ से कभी नाफेड की ओर से बिक्री किये जाने की, कभी दाम टूटने जैसी तमाम अफवाहें बाजार में सुनने को मिल सकती हैं। इन उलझनों से निकलने का एक रास्ता, आयातित सूरजमुखी और सोयाबीन तेल पर अधिकतम सीमा तक आयात शुल्क लगाना ही हो सकता है।
मंगलवार को तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:
सरसों तिलहन - 5,370-5,420 (42 प्रतिशत कंडीशन का भाव) रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली - 6,825-6,885 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) - 16,700 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली रिफाइंड तेल 2,560-2,825 रुपये प्रति टिन।
सरसों तेल दादरी- 11,150 रुपये प्रति क्विंटल।
सरसों पक्की घानी- 1,765-1,795 रुपये प्रति टिन।
सरसों कच्ची घानी- 1,725-1,850 रुपये प्रति टिन।
तिल तेल मिल डिलिवरी - 18,900-21,000 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 11,900 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 11,500 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 11,200 रुपये प्रति क्विंटल।
सीपीओ एक्स-कांडला- 9,050 रुपये प्रति क्विंटल।
बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 9,950 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 10,500 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन एक्स- कांडला- 9,550 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।
सोयाबीन दाना - 5,300-5,430 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन लूज- 5,040-5,060 रुपये प्रति क्विंटल।
मक्का खल (सरिस्का)- 4,010 रुपये प्रति क्विंटल।
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