नयी दिल्ली, छह नवंबर केंद्रीय बिजली मंत्री आर के सिंह ने सोमवार को कहा कि जबतक चौबीस घंटे नवीकरणीय ऊर्जा उपलब्ध नहीं होती, तबतक कोयला आधारित पारंपरिक तापीय बिजली क्षमता महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रहेगी।
सिंह ने राज्यों के बिजली और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रियों की यहां हो रही दो दिन की बैठक के पहले दिन संवाददाता सम्मेलन में कहा कि देश में लोगों को चौबीस घंटे बिजली उपलब्ध कराने को लेकर कोई समझौता नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि पारंपरिक बिजली (कोयला या लिग्नाइट आधारित) की तुलना में नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में अधिक वृद्धि होगी।
हालांकि, सिंह ने कहा कि तापीय बिजली की भूमिका तबतक बनी रहेगी जबतक कि बढ़ती मांग के अनुरूप चौबीस घंटे नवीकरणीय ऊर्जा उपलब्ध नहीं होती।
उन्होंने बढ़ती बिजली मांग का जिक्र किया। अगस्त, सितंबर और यहां तक कि अक्टूबर में बिजली मांग 20 प्रतिशत से अधिक बढ़ी।
बिजली मंत्री ने कहा कि नवंबर के पहले सप्ताह में बिजली की मांग 221 गीगावाट (एक गीगावाट बराबर एक हजार मेगावाट) के स्तर पर रही है।
उन्होंने कहा कि बढ़ती मांग के बीच, 24 घंटे बिजली आपूर्ति के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिये बिजली संयंत्रों को उनकी पूरी क्षमता से चलाना आवश्यक है।
सिंह ने कहा कि कि वर्तमान में ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिदिन औसतन बिजली आपूर्ति 22.5 घंटे, जबकि शहरों में 23.5 घंटे है।
उन्होंने कहा कि राज्यों को बिजली संयंत्रों को उनकी पूरी क्षमता से चलाने और छह प्रतिशत मिश्रण के लिये कोयला आयात करने को भी कहा गया है।
मंत्री ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र की कोल इंडिया कोयले का उत्पादन बढ़ा रही है। लेकिन बिजली की मांग भी 20 प्रतिशत से अधिक बढ़ रही है।
उन्होंने कहा कि तापीय बिजलीघरों में प्रतिदिन कोयले की कमी लगभग 2.5 लाख टन है। ऐसे में आयातित कोयले का मिश्रण महत्वपूर्ण है।
बैठक में जिन अन्य मुद्दों पर चर्चा हुई, उनमें हरित ऊर्जा गलियारा, हरित हाइड्रोजन, नवीकरणीय ऊर्जा खरीद जिम्मेदारी आदि शामिल हैं।
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