देश की खबरें | मानवाधिकारों की रक्षा करने में सुरक्षा बलों की भूमिका महत्वपूर्ण : केंद्रीय मंत्री

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एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 10 दिसंबर केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय ने बृहस्पतिवार को कहा कि कर्तव्य के पालन के अलावा मानवाधिकारों की रक्षा करने में सुरक्षा बलों की महत्वपूर्ण भूमिका है ।

मानवाधिकार दिवस के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि केंद्र ने समाज के कमजोर तबके के कल्याण और विकास को शीर्ष प्राथमिकता दी है।

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कार्यक्रम को डिजिटल तरीके से संबोधित करते हुए राय ने कहा, ‘‘मानवाधिकारों की रक्षा करने में सुरक्षा बलों की महत्वपूर्ण भूमिका है। सुरक्षा बल पूरे साहस के साथ अपने कर्तव्य का निर्वहन करने के साथ ही नागरिकों के अधिकारों के प्रति भी अत्यंत संवेदनशीलता का परिचय दे रहे हैं।’’

गृह मंत्रालय के एक बयान के मुताबिक गृह राज्यमंत्री राय ने कहा कि कमजोर वर्गों के अधिकारों की रक्षा तभी की जा सकती है जब न केवल वे अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हों बल्कि समाधान भी उन तक पहुंचे।

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उन्होंने कहा कि मानव अधिकारों के संवर्धन एवं संरक्षण में स्थानीय पंचायतों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसलिए उन्हे सशक्त करने का काम किया गया है।

मंत्री ने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान सरकार द्वारा प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के माध्यम से प्रत्येक व्यक्ति के भोजन के अधिकार की रक्षा कर यह सुनिश्चित किया गया कि कोई भी भूखा न रहे। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों के मजदूरों को सशक्त करने के लिए मनरेगा के तहत दी जाने वाली मजदूरी में भी वृद्धि की गई है। कोविड-19 से प्रभावित प्रवासी मजदूरों के अधिकारों का संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने उनके खातों में डीबीटी के माध्यम से सीधे पैसे पहुंचाए।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा मानवाधिकारों के प्रोत्साहन और संरक्षण के लिए किए गए कार्यों और उसमें लोगों के विश्वास की सराहना करते हुए केंद्रीय गृह राज्य मंत्री ने कहा कि आयोग भय और पक्षपात के बिना अर्द्धन्यायिक निगरानीकर्ता की अपनी भूमिका बखूबी निभा रहा है।

उन्होने कहा कि मानवाधिकारों को जमीनी स्तर पर मजबूत बनाना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य पी.सी.पंत ने कहा कि कोविड-19 महामारी की वजह से यह वर्ष पूरी दुनिया में मानवता के लिए बहुत ही कठिन रहा है। इससे निपटने के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य देखभाल व्यवस्था और आम जनता की तरफ से एकजुट प्रतिक्रिया की जरूरत है।

उन्होने कहा कि इस कठिन स्थिति से निपटने की सार्वजनिक स्वास्थ्य देखभाल व्यवस्था की सफलता इस बात पर निर्भर है कि मानवाधिकारों के सम्मान के हमारे आधार की जड़ें कितनी गहरी हैं।

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