देश की खबरें | जीवनसाथी चुनने का अधिकार जीवन जीने और निजी आजादी के अधिकार में अतर्निहित : अदालत

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा है कि बालिग होने पर एक व्यक्ति को जीवनसाथी चुनने का संवैधानिक रूप से अधिकार मिल जाता है और इस अधिकार से उसे वंचित करने पर ना केवल उसका मानवाधिकार प्रभावित होगा, बल्कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिला जीवन जीने और निजी स्वतंत्रता का अधिकार भी प्रभावित होगा।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

प्रयागराज, 24 नवंबर इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा है कि बालिग होने पर एक व्यक्ति को जीवनसाथी चुनने का संवैधानिक रूप से अधिकार मिल जाता है और इस अधिकार से उसे वंचित करने पर ना केवल उसका मानवाधिकार प्रभावित होगा, बल्कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिला जीवन जीने और निजी स्वतंत्रता का अधिकार भी प्रभावित होगा।

एक दंपति द्वारा उनकी शादी के खिलाफ दर्ज एफआईआर को चुनौती देने वाली रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने यह टिप्पणी की।

यह भी पढ़े | Bihar: नीतीश सरकार में दूर हो सकती है मुस्लिम मंत्री की कमी, ओवैसी और कांग्रेस विधायकों पर JDU की नजर.

अदालत ने कहा कि जीवनसाथी, भले ही उसका कोई भी धर्म हो, चुनने का अधिकार जीवन जीने और निजी स्वतंत्रता के अधिकार में अंतर्निहित है। अदालत ने महिला के पिता द्वारा उसके पति के खिलाफ दायर एफआईआर रद्द कर दी। महिला ने धर्म परिवर्तन के बाद उस व्यक्ति से शादी की थी।

न्यायमूर्ति पंकज नकवी और न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल ने कुशीनगर के सलामत अंसारी और प्रियंका खरवार उर्फ आलिया द्वारा दायर याचिका को स्वीकार करते हुए यह आदेश पारित किया।

यह भी पढ़े | PM Modi Virtual Meeting With CMs On COVID-19 Situation: राज्य के मुख्यमंत्रियों से बातचीत में पीएम मोदी ने कहा- कोरोना को लेकर आज भारत की स्थित दूसरे अन्य देशों से बेहतर.

याचिकाकर्ताओं ने कुशीनगर के विष्णुपुरा पुलिस थाने में 25 अगस्त, 2019 को आईपीसी की धारा 363, 366, 352, 506 और पॉक्सो कानून की धारा 7/8 के तहत दर्ज की गई एफआईआर रद्द करने की मांग की थी।

याचिकाकर्ताओं की दलील थी कि दंपति बालिग हैं और वे अपनी पसंद का जीवनसाथी चुनने में सक्षम हैं। हालांकि महिला के पिता के वकील ने इस आधार पर याचिका का विरोध किया कि महज शादी के लिए धर्म परिवर्तन प्रतिबंधित है और इस तरह की शादी की कानून में कोई शुचिता नहीं है।

पीठ ने कहा, ‘‘हम प्रियंका खरवार और सलामत को हिंदू और मुस्लिम के तौर पर नहीं देखते, बल्कि दो बालिग व्यक्तियों के तौर पर देखते हैं जो अपनी इच्छा से पिछले सालभर से शांतिपूर्वक और खुशी खुशी साथ रह रहे हैं।’’

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

Share Now

संबंधित खबरें

India vs England, ICC T20 World Cup 2026 2nd Semi-Final Date And Time: कब और कितने बजे से खेला जाएगा भारत बनाम इंग्लैंड के बीच दूसरा सेमीफाइनल? इस स्टेडियम में भिड़ेंगी दोनों टीमें, यहां जानें वेन्यू समेत मैच से जुड़ी सभी जानकारी

South Africa vs New Zealand T20I Stats: टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट में एक दूसरे के खिलाफ कुछ ऐसा रहा है दक्षिण अफ्रीका बनाम न्यूजीलैंड का प्रदर्शन, यहां देखें आंकड़े

मिडिल ईस्ट संकट पर स्पेन और अमेरिका में तनातनी, प्रधानमंत्री सांचेज ने हमलों को बताया 'रूसी रूलेट', ट्रंप ने स्पेन से व्यापारिक संबंध तोड़ने की दी धमकी

HK Dua Dies: नहीं रहे वरिष्ठ पत्रकार और पूर्व PM एचडी देवेगौड़ा के मीडिया सलाहकार एचके दुआ, 88 साल की उम्र में निधन

\