देश की खबरें | असम समझौते की तार्किकता पुनः स्थापित हुई, विपक्षी दलों ने शीर्ष अदालत के फैसले का स्वागत किया
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नयी दिल्ली, 17 अक्टूबर असम समझौते पर हस्ताक्षर करने वालों में शामिल अखिल असम छात्र संघ (एएएसयू) तथा सभी विपक्षी दलों ने कट-ऑफ तिथि को लेकर उच्चतम न्यायालय के फैसले का बृहस्पतिवार को स्वागत करते हुए कहा कि इसने ऐतिहासिक समझौते की “तार्किकता” को पुनः स्थापित किया है।
एएएसयू और अन्य ने फैसले को “ऐतिहासिक” बताया, जबकि कानून के प्रावधान को चुनौती देने वाले असम संमिलिता महासंघ (एएसएम) ने फैसले को “दुर्भाग्यपूर्ण” करार देते हुए कहा कि यह राज्य को विदेशियों के लिए “डंपिंग ग्राउंड” बना देगा। वहीं, मामले में पक्षकार रहे मुस्लिम संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिंद के दोनों समूहों ने भी फैसले का स्वागत किया है।
दूसरी ओर, सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने सतर्कता बरतते हुए कहा कि सरकार अब इस बात पर विचार करेगी कि असम के मूल लोगों के हितों की रक्षा कैसे की जाए।
उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए नागरिकता अधिनियम की धारा 6ए की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा, जो एक जनवरी 1966 से 25 मार्च 1971 तक बांग्लादेश से असम आए प्रवासियों को भारतीय नागरिकता प्रदान करती है।
प्रधान न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने कहा कि असम समझौता अवैध प्रवास की समस्या का राजनीतिक समाधान है।
असम समझौते पर 1985 में छह साल तक चले हिंसक विदेशी विरोधी आंदोलन के बाद हस्ताक्षर किए गए थे। इस समझौते में अन्य प्रावधानों के अलावा यह भी कहा गया था कि 25 मार्च 1971 को या उसके बाद असम आने वाले सभी विदेशियों का पता लगाया जाएगा और उनके नाम मतदाता सूची से हटा दिए जाएंगे तथा उन्हें निर्वासित करने के लिए कदम उठाए जाएंगे।
समझौते के अंतर्गत आने वाले लोगों की नागरिकता से निपटने के लिए एक विशेष प्रावधान के रूप में धारा 6ए को 1985 में नागरिकता अधिनियम में शामिल किया गया था।
एएएसयू ने फैसले का स्वागत किया और कहा कि यह असम के संघर्षशील लोगों की जीत है जो पिछले चार दशकों से निस्वार्थ भाव से असम समझौते के पक्ष में खड़े रहे हैं।
एएएसयू ने एक बयान में कहा, “इस फैसले ने असम आंदोलन और असम समझौते की तार्किकता को पुनः स्थापित किया है। हम इस ऐतिहासिक अवसर पर शहीदों को श्रद्धांजलि देते हैं। हम पुनः मांग करते हैं कि असम समझौते के प्रत्येक प्रावधान को पूर्ण रूप से लागू किया जाए।”
एएएसयू के मुख्य सलाहकार समुज्जल भट्टाचार्य ने ने ‘पीटीआई-’ से कहा, “हम उच्चतम न्यायालय के फैसले का तहे दिल से स्वागत करते हैं। यह एक ऐतिहासिक फैसला है। इससे यह स्थापित हो गया है कि असम आंदोलन वास्तविक कारणों से किया गया था और असम समझौते के सभी प्रावधानों को अब उच्चतम न्यायालय ने कानूनी मान्यता दे दी है।”
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