देश की खबरें | ईपीएफ कानून के प्रावधान निजी सुरक्षा एजेन्सियों पर भी लागू होते हैं : न्यायालय

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को कहा कि कर्मचारी भविष्य निधि कानून निजी सुरक्षा एजेन्सियों पर भी लागू होते हैं, जो अपने ग्राहकों को सुरक्षाकर्मी उपलब्ध कराते हैं।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, दो दिसंबर उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को कहा कि कर्मचारी भविष्य निधि कानून निजी सुरक्षा एजेन्सियों पर भी लागू होते हैं, जो अपने ग्राहकों को सुरक्षाकर्मी उपलब्ध कराते हैं।

न्यायमूर्ति नवीन सिन्हा और न्यायमूर्ति सूर्यकांत की पीठ ने कहा कि अपीलकर्ता कंपनी अपने ग्राहकों को पैसा लेकर प्रशिक्षित और दक्ष सुरक्षाकर्मी उपलब्ध कराने की विशेष सेवायें प्रदान करने का कारोबार कर रही है।

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शीर्ष अदालत ने इस फर्म की इस दलील को अस्वीकार कर दिया कि वह तो सिर्फ चौकीदार उपलब्ध कराती है। न्यायालय ने कहा कि निजी सुरक्षा एजेन्सियां (नियमन) कानून, 2005 में स्पष्ट प्रावधान हैं कि फर्म ऐसे सुरक्षाकमिर्यों की नियोक्ता है और वह उन्हें पारिश्रमिक देती है।

पीठ ने कहा, ‘‘सिर्फ इस वजह से कि ग्राहक एक समझौते के तहत अपीलकर्ता को धन देता है और इसके एवज में अपीलकर्ता इस तरह के करार से मिलने वाले धन से सुरक्षाकर्मियों को पारिश्रमिक देता है, यह ग्राहक को सुरक्षाकर्मियों का न तो नियोक्ता बनाता है और न ही सुरक्षाकर्मी ग्राहक के कर्मचारी बनते हैं।’’

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न्यायालय ने कहा कि अपीलकर्ता कंपनी ने 2005 के तहत कानूनी रजिस्टर कभी भी ईपीएफ कानून के अंतर्गत प्राधिकारियों को उपलब्ध नहीं कराये और ऐसी स्थिति में उसे यह कहने में कोई संकोच नहीं है कि उसने वास्तव में संबंधित कागजात छिपाये।

शीर्ष अदालत ने कहा कि ईपीएफ कानून के प्रावधान उन निजी सुरक्षा एजेन्सी पर लागू होते हैं जो अपने ग्राहक को विशेष सुरक्षा प्रदान करती है, बशर्ते वह ईपीएफ कानून की जरूरतों को पूरा करती हो।

न्यायालय ने पैंथर सेक्यूरिटी सर्विस प्रा लि की अपील पर यह फैसला सुनाया। यह सुरक्षा एजेन्सी पैसे लेकर अपने ग्राहकों को निजी सुरक्षा गार्ड उपलब्ध कराती है।

कानून के तहत पंजीकृत इस कंपनी ने उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ शीर्ष अदालत में अपील दायर की थी। उच्च न्यायालय ने सहायक भविष्य निधि आयुक्त, कानपुर के इस आदेश की पुष्टि की थी कि अपीलकर्ता को ईपीएफ कानून के प्रावधानों का अनुपालन करना होगा और उसे 15 दिन के भीतर कानूनी रूप से अनिवार्य राशि जमा करानी होगी।

कंपनी का तर्क था कि वह ईपीएफ कानून के तहत नहीं आती है और किसी प्रकार की विशेष सेवायें प्रदान नहीं करती है बल्कि अपने ग्राहकों को चौकीदारों की सुविधा प्रदान करती है।

अनूप

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