जम्मू, तीन मार्च मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सोमवार को कहा कि जम्मू-कश्मीर विधानसभा द्वारा पिछले साल अपने पहले सत्र में विशेष दर्जे के मुद्दे पर पारित किए गए प्रस्ताव को केंद्र सरकार ने खारिज नहीं किया है जो बड़ी बात है और इस बात पर बल दिया कि अगस्त 2019 में निरस्त किए गए अनुच्छेद-370 पर कोई अन्य प्रस्ताव लाने की जरूरत नहीं है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी विधायकों को मिलकर काम करना चाहिए ताकि सरकार को लोगों के हितों की प्राथमिकताओं को पूरा करने में मदद मिले।
जब यह पूछा गया कि कुछ सदस्य अनुच्छेद-370 को निरस्त करने की निंदा करने के लिए एक नया प्रस्ताव लाने की योजना बना रहे हैं तो इस पर विधानसभा के बाहर मुख्यमंत्री ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘हमें जो करना था, वह पहले (विधानसभा) सत्र (नवंबर 2024) में ही कर दिया। सदन द्वारा पारित प्रस्ताव अब भी कायम है। पीडीपी और अन्य ने प्रस्ताव पारित करने में हमारी मदद की और यह अब भी कायम है जो बड़ी बात है।’’
जम्मू-कश्मीर विधानसभा का 40 दिवसीय बजट सत्र सोमवार को उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के अभिभाषण के साथ शुरू हुआ। सत्र में कुल 22 बैठकें होंगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ लोग सोच रहे हैं कि विशेष दर्जे पर कोई भी प्रस्ताव केंद्र सरकार द्वारा सीधे तौर पर खारिज कर दिया जाएगा।
उन्होंने कहा, ‘‘प्रस्ताव खारिज नहीं किया गया और यह अभी भी कायम है, इसलिए इस पर आगे बात करने की कोई जरूरत नहीं है।’’
जम्मू-कश्मीर विधानसभा ने पिछले वर्ष छह नवंबर को एक प्रस्ताव पारित किया था जिसमें केंद्र से तत्कालीन राज्य के विशेष दर्जे को बहाल करने के लिए एक संवैधानिक तंत्र तैयार का आग्रह किया गया था।
अब्दुल्ला ने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) उसे नहीं दोहराएगी जो पहले ही किया जा चुका है।
उन्होंने कहा, ‘‘ऐसा नहीं है कि हम इस बात को दोहराएंगे। हमें जो करना था, वह पहले सत्र में ही कर दिया। अगर हम प्रस्ताव नहीं लाये होते तभी उस पर चर्चा करने का औचित्य था। हम प्रस्ताव लाए और सदन ने उसे बहुमत से पारित किया तो इस पर आगे बात करने की क्या जरूरत है?’’
हाल ही में सोपोर और कठुआ में मारे गए दो लोगों के परिवारों के लिए न्याय और अनुच्छेद-370 की बहाली तथा पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर निर्दलीय विधायक खुर्शीद अहमद के विरोध प्रदर्शन के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, ‘‘सदन के अंदर बात होगी, बाहर नहीं। यह कोई तरीका नहीं है।’’
अब्दुल्ला ने कहा कि सरकार उन मुद्दों पर जवाब देगी, जिन्हें सदस्य सदन में उठाएंगे।
मुख्यमंत्री ने भाजपा के साथ किसी भी गठबंधन से भी इनकार किया और कहा कि ऐसी किसी चीज की कोई गुंजाइश या जरूरत नहीं है।
उन्होंने कहा, ‘‘हम दोनों की विचारधाराएं अलग-अलग हैं और जम्मू-कश्मीर के संबंध में हमारे दृष्टिकोण में भी जमीन-आसमान का अंतर है।’’
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