देश की खबरें | देश में स्कूल विद्यार्थियों के ट्यूशन पढ़ने के अनुपात में बढ़ोतरी हुई : एएसईआर 2022
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. कोविड महामारी से पहले की तुलना में देश भर में स्कूल के बाद ट्यूशन जाने वाले विद्यार्थियों की संख्या में चार फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। यह जानकारी ‘एनुअल स्टेटस ऑफ एजुकेशन रिपोर्ट’ (एएसईआर) 2022 से मिली है।
नयी दिल्ली, 18 जनवरी कोविड महामारी से पहले की तुलना में देश भर में स्कूल के बाद ट्यूशन जाने वाले विद्यार्थियों की संख्या में चार फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। यह जानकारी ‘एनुअल स्टेटस ऑफ एजुकेशन रिपोर्ट’ (एएसईआर) 2022 से मिली है।
बुधवार को जारी इस रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड समेत कुछ राज्यों में ट्यूशन जाने वाले विद्यार्थियों की संख्या आठ प्रतिशत बढ़ी है।
अहम रिपोर्ट यह भी बताती है कि ग्रामीण भारत में पहली से आठवीं कक्षा तक के बच्चों का बीते दशक में ट्यशून लेने के अनुपात में लगातार बढ़ोतरी हुई है।
रिपोर्ट में कहा गया है, “ 2018-2022 के बीच यह अनुपात सरकारी व निजी दोनों प्रकार के स्कूलों के विद्यार्थियों में बढ़ा है। राष्ट्रीय तौर पर पहली से आठवीं कक्षा के बच्चों का ट्यूशन लेने का अनुपात 2018 में 26.4 प्रतिशत था जो 2022 में बढ़कर 30.5 फीसदी हो गया है।”
रिपोर्ट के मुताबिक, “ उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में सशुल्क ट्यूशन लेने वाले विद्यार्थियों का अनुपात 2018 के स्तर से आठ प्रतिशत से अधिक बढ़ा है।”
एएसईआर राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण है जो ग्रामीण भारत में बच्चों के स्कूल जाने व शिक्षा से संबंधित तस्वीर मुहैया कराता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि पश्चिम बंगाल, बिहार जैसे कई राज्यों में बच्चों को ट्यूशन भेजना परंपरा लगती है जहां निजी स्कूल जाने वाले विद्यार्थियों की संख्या कम है लेकिन तकरीबन 70 फीसदी बच्चे ट्यूशन के लिए जाते हैं।
इसमें कहा गया है कि इन राज्यों के गांवों में बड़ी संख्या में शिक्षित युवक-युवतियां बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर आजीविका कमा रहे हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि महामारी के बाद के दौर में अन्य राज्यों में ट्यूशन का दायरा बढ़ सकता है, क्योंकि पढ़े-लिखे युवक- युवतियां नौकरियों के इंतजार में इसके लिए तैयार हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार और झारखंड ऐसे राज्य हैं जहां बच्चों को ट्यूशन भेजने का ज्यादा चलन है। इसमें कहा गया है कि 2022 में बिहार में 70 फीसदी जबकि झारखंड में 45 प्रतिशत बच्चों ने ट्यूशन ली जबकि हिमाचल प्रदेश में यह स्तर 10 फीसदी और महाराष्ट्र में 15 प्रतिशत है।
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