देश की खबरें | दिल्ली के ऑटो चालकों की मुश्किलें कम सवारी और ऋणदाताओं की ओर से कर्ज चुकाने का दबाव बढ़ाने से बढ़ी

नयी दिल्ली, 15 जुलाई कोरोना वायरस के संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए लागू पाबंदियों में दिल्ली सरकार द्वारा छूट दिए जाने के दो महीने बाद भी शहर के ऑटो रिक्शा चालकों का संघर्ष जारी है क्योंकि कम सवारी और ऋणदाताओं का दबाव उनकी मुश्किल और बढ़ा रही है।

महामारी के चलते बहुत कम लोग घरों से बाहर निकल रहे हैं और उनकी सेवाएं ले रहे हैं जबकि वाहनों को खरीदने के लिए जिन निजी वित्तपोषकों से उन्होंने पैसा लिया था वे ऋण की राशि लौटाने का दबाव बना रहे हैं।

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उल्लेखनीय है कि 17 मई को कोरोना वायरस की वजह से लागू लॉकडाउन में ढील दी गई थी। इसके तहत ऑटो रिक्शा सहित सार्वजनिक वाहनों के परिचालन की अनुमति दी गई।

ऑटोरिक्शा यूनियन के नेताओं ने कहा कि कोरोना वायरस के भय के चलते लोग घरों में ही हैं ऐसे में इन दिनों ऑटो रिक्शा चालकों को सवारी तलाशने में बहुत मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है। अधिकतर चालक गुजारा चलाने में भी मुश्किल का सामना कर रहे हैं।

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उन्होंने बताया कि दिल्ली की सड़कों पर चलने के लिए 95 हजार से अधिक ऑटो रिक्शा पंजीकृत हैं और अधिकतर पाली में चलते हैं, लेकिन लॉकडाउन के साथ बड़ी संख्या में ऑटो रिक्शा चालक जो किराए पर ऑटोरिक्शा चलाते हैं, वे अपने गृह प्रदेश चले गए।

दिल्ली ऑटो रिक्शा संघ के महासचिव राजेंद्र सोनी ने कहा, ‘‘अधिकतर चालक ऑटो रिक्शा लेकर बिहार, उत्तर प्रदेश और अन्य राज्य में स्थित अपने घर चले गए। उनमें से कुछ लौटे हैं, लेकिन अधिकतर महामारी के प्रकोप के कम होने का इंतजार कर रहे हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘मांग में भारी गिरावट आने की वजह से हम अपने परिवार का भरण-पोषण करने में भी मुश्किल का सामना कर रहे हैं क्योंकि कोरोना वायरस की वजह से लोग बाहर नहीं निकल रहे हैं। स्थिति उन चालकों के लिए और खराब है जिन्होंने ऑटो रिक्शा खरीदने के लिए कर्ज लिया है क्योंकि ऋणदाता भुगतान करने के लिए दबाव बना रहे हैं।’’

कई ऑटो रिक्शा चालकों ने शिकायत की कि कई निजी कर्जदाता ऋण की किस्त जमा करने के लिए दबाव डाल रहे हैं और ऐसा नहीं करने पर वाहन को जब्त करने की धमकी दे रहे हैं।

प्रदीप आहूजा ने कहा, ‘‘मैंने निजी ऋणदाता से ढाई लाख रुपये का कर्ज लिया है और अब वह भुगतान करने की मांग कर रहा है और ऐसा नहीं करने पर ऑटो रिक्शा अपने कब्जे में लेने की धमकी दे रहा है। कुल पांच लोगों का मेरा परिवार है, पिछले महीने मेरा ऑपरेशन हुआ था। मेरे पास परिवार को खिलाने के लिए पैसे नहीं हैं, ऐसे में ऋण की किस्त कहां से भरूं।’’

सोनी ने कहा कि उनके संघ ने सरकार से मांग की है कि कोरोना वायरस की महामारी को देखते हुए वह ऑटो रिक्शा ऋण पर पूरे साल के लिए ब्याज की राशि माफ कर दे।

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र ऑटो ड्राइवर यूनियन के सचिव अनुज राठौड़ ने रेखांकित किया कि किराए का ऑटो रिक्शा चलाने वालों की हालत बहुत ही दयनीय है।

उन्होंने कहा, ‘‘कोरोना वायरस से संक्रमित होने के खतरे के बावजूद ऑटो रिक्शा चालक वाहन चला रहे हैं, लेकिन यह दुर्भाग्य है कि वे अपने परिवार का भरण-पोषण करने लायक भी कमाई नहीं कर पा रहे हैं।’’

ऑटो यूनियन के मुताबिक कई ऑटो रिक्शा मालिक अपने वाहन को दूसरे चालकों को पाली में चलाने के लिए किराए पर देते हैं और रोजाना 200 से 350 रुपये की दर से किराया लेते हैं।

करावल नगर के ऑटो रिक्शा चालक राजेश बिधुरिया ने कहा, ‘‘मैंने अबतक 70 रुपये की कमाई की है और मुझे ऑटो रिक्शा के मालिक को 200 रुपये देने है। यह रोज की स्थिति है। ऑटो रिक्शा मालिक को किराया देने के बाद मेरे पास बहुत कम पैसे बचते हैं।’’

पूर्वी दिल्ली के विकास मार्ग पर सवारी का इंतजार कर रहे एक अन्य ऑटो रिक्शा चालक रविंदर ने बताया कि ईंधन और सैनिटाइजर जैसे सामान खरीदने के बाद बहुत कम पैसे बचते हैं और इस आमदनी पर जीवन-यापन करना बहुत मुश्किल है।

उन्होंने कहा, ‘‘ऑटो रिक्शा का 250 रुपये किराया देने के बाद 200 से 250 रुपये बचते हैं जिससे मैं अपने माता-पिता सहित सात सदस्यों के परिवार के लिए खाने की व्यवस्था कर पाता हूं।’’

ऑटो संघ ने कहा कि दिल्ली सरकार ने लॉकडाउन के दौरान एक बार सार्वजनिक परिवहन चालकों को 5,000 रुपये की वित्तीय मदद की थी।

उन्होंने कहा कि केंद्र और दिल्ली सरकार को ऑटो रिक्शा चालकों को दिए गए सभी कर्जों पर ब्याज, जुर्माना और अन्य शुल्क एक साल के लिए माफ कर देना चाहिए।

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