नयी दिल्ली, 27 अप्रैल दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को कहा कि कोविड-19 वायरस से निपटने के लिए लगाये गये लॉकडाउन के कारण होने वाली परेशानी गरीबों, जरूरतमंदों और हाशिए पर रहने वाले तबके को ‘‘खाद्यानों की पहुंच से वंचित’’ करके बढ़ी है।
अदालत ने दिल्ली की आम आदमी पार्टी (आप) सरकार को राशन की सभी दुकानें खुली रखने के निर्देश दिये। साथ ही अदालत ने कहा कि जरूरतमंदों की आवश्यकताओं को पूरा करने के वास्ते इन्हें सप्ताह के सातों दिन खुला रखा जाये।
उच्च न्यायालय एक गैर सरकार संगठन (एनजीओ) की एक याचिका पर सुनवाई कर रहा था। याचिका में आप सरकार को यह निर्देश दिये जाने का आग्रह किया गया है कि सरकार यह सुनिश्चित करे कि लॉकडाउन के दौरान समुचित पहचान या राशन कार्ड नहीं होने जैसे तकनीकी आधारों के कारण किसी को भी भोजन के अभाव में भूखा नहीं रहना पड़े।
न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल और तलवंत सिंह की एक पीठ ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये सुनवाई की। दिल्ली सरकार ने पीठ को बताया कि विभिन्न कदम उठाकर जरूरतमंद लोगों की परेशानियों को कम करने के प्रयास किये गये हैं।
दिल्ली सरकार ने पीठ को बताया कि निर्दिष्ट स्थानों पर बड़ी संख्या में लोगों को एक दिन में दो बार गर्म भोजन उपलब्ध कराया जाता है।
पीठ ने याचिका पर दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया और तीन दिन के भीतर अपना जवाब दाखिल करने को कहा।
अदालत ने मामले की अगली सुनवाई की तिथि छह मई तय की।
उच्च न्यायालय ने यह सुनिश्चित करने के भी निर्देश किये कि राशन की सभी दुकानें खुली रहें और केन्द्र तथा दिल्ली सरकार द्वारा बनाई गई नीति के अनुसार खाद्यान्न का वितरण किया जाये।
दिल्ली रोजी रोटी अधिकार अभियान द्वारा दाखिल याचिका में दिल्ली सरकार को यह सुनिश्चित करने का निर्देश देने का भी आग्रह किया गया है कि सभी सरकारी स्कूलों में मध्याह्न भोजन उपलब्ध कराना जारी रखा जाये।
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