अहमदाबाद, 29 जुलाई गुजरात उच्च न्यायालय ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) की आवश्यकता का आकलन करने के लिए गठित पांच सदस्यीय समिति की संरचना को चुनौती देने वाली याचिका को मंगलवार को खारिज कर दिया। याचिका में कहा गया था कि समिति में अल्पसंख्यक समुदायों का कोई भी सदस्य शामिल नहीं है।
न्यायमूर्ति निरल एस. मेहता की पीठ ने सूरत निवासी अब्दुल वहाब सोपारीवाला की याचिका खारिज कर दी।
अदालत ने फैसला सुनाते हुए कहा, " (याचिका) खारिज की जाती है।" विस्तृत आदेश का इंतज़ार है।
इस वर्ष चार फरवरी को राज्य के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल ने यूसीसी की आवश्यकता का आकलन करने तथा इसके लिए एक विधेयक का मसौदा तैयार करने के वास्ते समिति के गठन की घोषणा की थी।
समिति की संरचना को चुनौती देते हुए याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि इसमें धार्मिक अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्य नहीं हैं, तथा कहा कि ऐसे हितधारकों को शामिल करना महत्वपूर्ण है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि विचारों और प्रथाओं की विविधता पर विचार किया जाए।
इस समिति की अध्यक्षता उच्चतम न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना देसाई करेंगी। सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी सी.एल. मीणा, अधिवक्ता आर.सी. कोडेकर, वीर नर्मद दक्षिण गुजरात विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति दक्षेश ठाकर और सामाजिक कार्यकर्ता गीताबेन श्रॉफ इसके सदस्य हैं।
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