मुंबई, 22 जुलाई मुंबई ट्रेन बम विस्फोट मामले में विशेष अदालत द्वारा 2015 में बरी किए गए एकमात्र व्यक्ति अब्दुल वाहिद शेख ने मंगलवार को मामले की फिर से जांच के लिए उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक विशेष जांच दल (एसआईटी) के गठन की मांग की।
मुंबई उच्च न्यायालय द्वारा मामले में सभी 12 आरोपियों को बरी करने के आदेश के एक दिन बाद शेख ने यह मांग की है। न्यायायल ने आदेश में कहा कि अभियोजन पक्ष मामले को साबित करने में पूरी तरह विफल रहा है।
सिलसिलेवार बम विस्फोटों के आरोप में महाराष्ट्र आतंकवाद रोधी दस्ते (एटीएस) द्वारा शेख को गिरफ्तार किए जाने के नौ साल बाद 2015 में विशेष अदालत ने उन्हें (शेख को) सभी आरोपों से मुक्त कर दिया था।
इस मामले में अदालत ने 12 दोषियों में से पांच को मौत की सज़ा सुनाई थी जबकि सात को आजीवन कारावास की सजा के आदेश दिए थे। मौत की सजा पाए एक दोषी की 2021 में मौत हो गई थी।
सोमवार को उच्च न्यायालय ने सभी 12 आरोपियों को रिहा कर दिया और कहा कि अभियोजन पक्ष मामले को साबित करने में पूरी तरह विफल रहा और "यह विश्वास करना कठिन है कि आरोपियों ने अपराध किया है।"
पेशे से शिक्षक शेख एटीएस द्वारा 12 लोगों पर किए गए अत्याचारों को लेकर मुखर रहे हैं। उन्होंने जेल में रहते हुए ‘बेगुनाह कैदी’ नाम की एक किताब लिखी थी।
शेख ने ‘पीटीआई-’ से कहा, ‘‘सरकार को उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की अध्यक्षता में एसआईटी गठित कर मामले की फिर से जांच करानी चाहिए ताकि ट्रेन बम विस्फोट के असली अपराधियों की गिरफ्तारी सुनिश्चित की जा सके।’’
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