विदेश की खबरें | नाइजर के लोग जुंटा के खिलाफ विभिन्न देशों की सैन्य कार्रवाई से मुकाबले की तैयारी कर रहे

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. राजधानी नियामी के निवासी पश्चिम अफ़्रीका के क्षेत्रीय संगठन ‘इकोवास’ के किसी भी हमले से निपटने के लिए सेना की सहायता को लेकर स्वयंसेवकों की बड़े पैमाने पर भर्ती का आह्वान कर रहे हैं।

श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

राजधानी नियामी के निवासी पश्चिम अफ़्रीका के क्षेत्रीय संगठन ‘इकोवास’ के किसी भी हमले से निपटने के लिए सेना की सहायता को लेकर स्वयंसेवकों की बड़े पैमाने पर भर्ती का आह्वान कर रहे हैं।

इकोनॉमिक कम्युनिटी ऑफ वेस्ट अफ्रीकन स्टेट (इकोवास) का कहना है कि यदि जुंटा अपदस्थ किए गए राष्ट्रपति मोहम्मद बजौम को बहाल नहीं करता है तो वह सैन्य बल का इस्तेमाल करेगा। ‘इकोवास’ ने नाइजर में व्यवस्था बहाल करने के लिए एक ‘‘स्टैंडबाय फोर्स’’ को सक्रिय कर दिया है, क्योंकि जुंटा ने बजौम को रिहा करने और उन्हें पद पर बहाल करने की समय सीमा को नजरअंदाज कर दिया है।

नियामी में स्थानीय लोगों के एक समूह के नेतृत्व में इस पहल का उद्देश्य नाइजर की रक्षा के लिए स्वयंसेवकों का पंजीकरण कर देश भर से हजारों स्वयंसेवकों की भर्ती करना है। इस पहल के संस्थापकों में से एक अम्सरौ बाको ने मंगलवार को ‘द एसोसिएटेड प्रेस’ को बताया कि अगर जुंटा को मदद की जरूरत होगी तो समूह लड़ेगा, चिकित्सा देखभाल में सहायता करेगा और अन्य कार्यों के साथ-साथ तकनीकी और इंजीनियरिंग साजो सामान भी प्रदान करेगा।

भर्ती अभियान शनिवार को नियामी के साथ-साथ नाइजीरिया और बेनिन की सीमा पास स्थित उन शहरों में भी शुरू होगा जहां से आक्रमणकारी सेनाएं प्रवेश कर सकती हैं। दोनों देशों ने कहा है कि वे हस्तक्षेप में भाग लेंगे।

बाको ने कहा कि 18 साल से अधिक उम्र का कोई भी व्यक्ति पंजीकरण करा सकता है और जरूरत पड़ने पर लोगों को बुलाने के लिए सूची जुंटा को दी जाएगी। उन्होंने कहा कि जुंटा इस पहल में शामिल नहीं है लेकिन पहल से अवगत है।

‘‘स्टैंडबाय फोर्स’’ की तैनाती की घोषणा के बाद पहली बार ‘इकोवास’ के रक्षा प्रमुखों की इस सप्ताह बैठक होने की उम्मीद है। यह स्पष्ट नहीं है कि समूह का सैन्य बल कब आक्रमण कर सकता है, लेकिन संभवतः इसमें कई हजार सैनिक शामिल होंगे।

नाइजर के लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित राष्ट्रपति बजौम को 26 जुलाई को उनकी सेना के सदस्यों ने एक तख्तापलट के बाद अपदस्थ कर दिया था और तब से वह नजरबंद हैं।

नाइजर को अल-कायदा और इस्लामिक स्टेट समूह से संबंधित जिहादी हिंसा को रोकने के प्रयास में पश्चिमी देशों के महत्वपूर्ण भागीदार के रूप में देखा जा रहा था। नाइजर के पूर्व औपनिवेशिक शासक फ्रांस और अमेरिका के इस क्षेत्र में लगभग 2,500 सैन्यकर्मी हैं जो नाइजर की सेना को प्रशिक्षित करते हैं।

तख्तापलट के बाद से फ्रांस और अमेरिका ने सैन्य अभियान निलंबित कर दिया है और जिहादी हमले बढ़ रहे हैं। रक्षा मंत्रालय ने मंगलवार को सरकारी टेलीविजन पर कहा कि टिल्लाबेरी क्षेत्र में चरमपंथियों द्वारा घात लगाकर किए गए हमले में कम से कम 17 सैनिक मारे गए और करीब 24 लोग घायल हो गए।

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