जरुरी जानकारी | नागरिकों की जानकारी की सुरक्षा करना है डीपीडीपी अधिनियम-2025 का उद्देश्य
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. सरकार ने पिछले सप्ताह डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण (डीपीडीपी) अधिनियम-2025 का मसौदा 18 फरवरी तक सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी किया था।
नयी दिल्ली, आठ जनवरी सरकार ने पिछले सप्ताह डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण (डीपीडीपी) अधिनियम-2025 का मसौदा 18 फरवरी तक सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी किया था।
सरकार द्वारा तैयार डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण (डीपीडीपी) अधिनियम-2025 में डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 के कार्यान्वयन के तरीके का प्रावधान है। नियम संसद द्वारा पारित अधिनियमों को लागू करने के लिए तैयार किए गए हैं।
नियमों का मसौदा 18 फरवरी, 2025 तक (45 दिन) सार्वजनिक टिप्पणी के लिए खुला है, और नागरिक माईजीओवी वेबसाइट पर अपनी टिप्पणियां दे सकते हैं।
इन नियमों में डेटा संरक्षण बोर्ड (डीपीबी) की स्थापना के लिए रूपरेखा तैयार की गई है। बोर्ड डीपीडीपी अधिनियम-2023 के अनुसार डिजिटल तरीके से काम करेगा।
नियमों में बच्चों की जानकारी (डेटा) के प्रसंस्करण के लिए अपनाई जाने वाली प्रक्रिया को स्पष्ट किया गया है, जहां संस्थाओं को यह सुनिश्चित करने के लिए तकनीकी और संगठनात्मक उपाय अपनाने की आवश्यकता होती है कि बच्चों की व्यक्तिगत जानकारी के प्रसंस्करण के लिए माता-पिता की सत्यापन योग्य सहमति प्राप्त की जाए।
नियमों में भारत के बाहर व्यक्तिगत डेटा के हस्तांतरण का प्रावधान है, लेकिन केवल कुछ मामलों में ही, जिन्हें सरकार द्वारा समय-समय पर अनुमोदित किया गया हो।
नियमों के मसौदे में एक समिति की परिकल्पना की गई है जो निर्दिष्ट व्यक्तिगत जानकारी के संबंध में महत्वपूर्ण डेटा उपयोगकर्ता द्वारा ऐसे हस्तांतरण पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश कर सकती है।
डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण विधेयक-2023 को तीन अगस्त, 2023 को लोकसभा में पेश किया गया था और सात अगस्त, 2023 को पारित किया गया था।
राज्यसभा में इसे नौ अगस्त को पेश किया गया और उसी दिन इसे पारित कर दिया गया। इसके बाद 11 अगस्त को राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम-2023 बन गया।
लोगों के व्यक्तिगत डेटा का उपयोग करके डिजिटलीकरण ने सेवाओं की डिलिवरी को बदल दिया है और जीवन को आसान बना दिया है, लेकिन इसके दुरुपयोग का खतरा भी बढ़ रहा है। इसलिए, यह जरूरी हो गया है कि डिजिटलीकरण वाले व्यक्तिगत डेटा को संरक्षित किया जाए।
डीपीडीपी अधिनियम-2023, डेटा का उपयोग करने वालों को व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा के लिए बाध्य करता है और उन्हें जवाबदेह बनाता है। डिजिटल मंच केवल वही डेटा एकत्र कर सकते हैं जो उनके कामकाज और उपयोगकर्ताओं द्वारा चुनी गई सेवाओं को प्रदान करने के लिए आवश्यक हैं। उदाहरण के लिए, किसी उपयोगकर्ता को अपने मोबाइल फोन पर ‘टॉर्च’ ऐप का उपयोग करने के लिए माइक्रोफोन या संपर्क एक्सेस देने की आवश्यकता नहीं होगी।
डीपीडीपी अधिनियम-2023 डिजिटल मंच द्वारा सहमति-आधारित व्यक्तिगत डेटा प्रसंस्करण प्रदान करता है।
इसका मतलब यह है कि डिजिटल मंच को लोगों को अंग्रेजी या संविधान में सूचीबद्ध 22 भारतीय ओं में से किसी एक में, उनकी पसंद की में सूचित करना होगा और उनकी सहमति लेनी होगी।
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(The above story first appeared on LatestLY on Jan 08, 2025 02:18 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

