देश की खबरें | आघात से विश्व में होने वाली मौतों की संख्या बढ़ कर 2030 तक करीब 50 लाख हो सकती है:अध्ययन
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नयी दिल्ली, 18 मई मस्तिष्क में रक्त प्रवाह रूक जाने पर आघात के चलते होने वाली मौतें 2030 तक बढ़ कर करीब 50 लाख हो जाने की संभावना है। एक अध्ययन में यह दावा किया गया है।
न्यूरोलॉजी जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में, इस तरह के आघात को रेखांकित किया गया है, जो सर्वाधिक सामान्य तरह का आघात है।
शंघाई में तोंगजी विश्वविद्यालय से संबद्ध एवं अध्ययनकर्ता लिज शियोंग ने कहा, ‘‘मस्तिष्क में रक्त प्रवाह बाधित होने से मौतों की वैश्विक संख्या भविष्य में बढ़ने की संभावना चिंताजनक है, लेकिन इस तरह के आघात की रोकथाम की जा सकती है।’’
शियोंग ने कहा, ‘‘हमारे अध्ययन के नतीजों से यह पता चलता है कि धूम्रपान और अधिक सोडियम युक्त आहार जैसी जीवनशैली, उच्च रक्तचाप और शरीर की लंबाई के अनुपात में अधिक वजन जैसे कारक साथ मिल कर आघात की संभावना को बढ़ाते हैं।’’
शोधकर्ताओं ने 1990-2019 के वैश्विक स्वास्थ्य डेटा एक्सचेंज के आंकड़ों का विश्लेषण किया। विश्व की आबादी बढ़ने के साथ-साथ इस तरह के आघात से होने वाली मौतों की संख्या 1990 के 20 लाख से बढ़कर 2019 में करीब 33 लाख हो गई।
शोधकर्ताओं ने कहा कि हालांकि इसकी दर 1990 में प्रति एक लाख लोगों में 66 से घट कर 2019 में प्रति एक लाख लोगों में 44 रह गई है।
शियोंग ने कहा, ‘‘आघात की दर में कमी का संभवत: यह मतलब है कि विश्वभर में आघात की संख्या में कुल वृद्धि आबादी बढ़ने और वृद्ध लोगों की संख्या बढ़ने से हुई होगी। ’’
शोधकर्ताओं ने पाया कि धूम्रपान, अधिक सोडियम युक्त आहार, उच्च रक्तचाप, उच्च कोलेस्ट्रॉल, गुर्दे (किडनी) का ठीक से काम नहीं करना, रक्त में शर्करा की मात्रा अधिक हो जाना और शरीर की लंबाई के अनुपात में वजन अधिक रहना ज्यादा संख्या में हुए आघात के लिए जिम्मेदार रहे हैं।
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